फर्रुखाबाद। आगामी पंचायत चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर मंथन जारी है। इसी क्रम में फर्रुखाबाद जनपद से जुड़ा एक अहम फैसला सामने आया है। डॉ. सुबोध यादव की पत्नी को अगला पंचायत चुनाव लड़ाने के प्रस्ताव पर समाजवादी पार्टी हाईकमान ने सहमति नहीं दी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव स्थानीय स्तर से भेजा गया था, लेकिन संगठनात्मक समीकरणों, जातीय संतुलन और क्षेत्रीय रणनीति को ध्यान में रखते हुए सपा नेतृत्व ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि पार्टी पंचायत चुनावों में परिवारवाद के आरोपों से बचने और नए चेहरों को अवसर देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय हों, लेकिन उनका सीधा असर संगठन की जमीनी मजबूती पर पड़ता है। इसी वजह से हाईकमान प्रत्याशियों के चयन में बेहद सतर्क रुख अपना रहा है। फर्रुखाबाद में भी पार्टी ऐसे चेहरों पर दांव लगाना चाहती है, जिनकी स्वतंत्र पहचान, सामाजिक स्वीकार्यता और संगठन में सक्रिय भूमिका हो।
डॉ. सुबोध यादव की पत्नी को लेकर लिए गए इस फैसले के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह निर्णय पार्टी के अनुशासन और केंद्रीकृत नेतृत्व को दर्शाता है, वहीं कुछ इसे स्थानीय नेतृत्व की अपेक्षाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
भविष्य की भूमिका से इनकार नहीं
हालांकि पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि यह फैसला किसी स्थायी अस्वीकृति का संकेत नहीं है। भविष्य में परिस्थितियों और रणनीति के अनुसार डॉ. सुबोध यादव परिवार की भूमिका पर दोबारा विचार किया जा सकता है। फिलहाल पंचायत चुनावों के लिए सपा नेतृत्व फर्रुखाबाद में नए और जमीनी चेहरों की तलाश में जुटा हुआ है।
इस निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों को केवल स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की बुनियाद मानकर चल रही है और उसी हिसाब से प्रत्याशी चयन की रणनीति बना रही है।

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