17 वर्षों से न्याय की आस में भटक रहा एडीओ का मामला
एटा
जनपद के अलीगंज क्षेत्र से जुड़ा एडीओ पंचायत की पेंशन वृद्धि का मामला प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। वर्ष 2009 से शुरू हुआ यह प्रकरण आज तक लंबित है, जिससे संबंधित कर्मचारी को अब तक उसके अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल सका है। हाल ही में इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) मोहम्मद राशिद को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद पीड़ित कर्मचारी को राहत नहीं मिल पाई है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में इस प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए पंचायत निदेशक को वेतन एवं पेंशन निर्धारण के आदेश दिए गए थे। आदेश के बाद कर्मचारी को वेतन वृद्धि का लाभ तो दे दिया गया, लेकिन पेंशन वृद्धि की फाइल विभिन्न स्तरों पर अटकती रही और आज तक उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इस दौरान विभागीय उदासीनता का आलम यह रहा कि एक के बाद एक लगभग दस डीपीआरओ का तबादला होता रहा, लेकिन किसी ने भी इस मामले को प्राथमिकता में नहीं लिया।
पीड़ित कर्मचारी वर्षों से अपने हक के लिए विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। कई बार प्रार्थना पत्र देने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उसे केवल आश्वासन ही मिला है। इस लापरवाही ने न केवल एक कर्मचारी को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान किया है, बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन द्वारा डीपीआरओ के निलंबन की कार्रवाई को एक सख्त कदम माना जा रहा है, लेकिन जब तक पीड़ित को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल जाता, तब तक यह कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पुराने मामले का निस्तारण कितनी तेजी से करता है और संबंधित कर्मचारी को उसका हक दिला पाता है या नहीं।


