ट्रांसफर के बाद भी कुर्सी से चिपके डीपीआरओ राजेश चौरसिया

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शासन आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं 

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश शासन की सख्त कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश चौरसिया ने अपने तबादले के बाद भी शासन आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए कुर्सी पर कब्जा जमाए रखा है। शासन ने 3 अक्टूबर को राजेश चौरसिया का तबादला कासगंज के लिए कर दिया था, लेकिन लगभग एक महीना बीत जाने के बाद भी उन्होंने न तो चार्ज छोड़ा और न ही नए जनपद में कार्यभार ग्रहण किया।
विभाग के विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि अधिकारी तत्काल अपने नए जिले में योगदान दें, लेकिन राजेश चौरसिया ने इस आदेश को भी हवा में उड़ा दिया। यह मामला न सिर्फ शासन की साख पर बट्टा लगा रहा है, बल्कि यह दर्शा रहा है कि प्रदेश की नौकरशाही में कुछ अधिकारी खुद को कानून और आदेशों से ऊपर समझने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, जब राजेश चौरसिया फर्रुखाबाद आए थे, तब वे एडीपीआरओ के पद पर तैनात थे। उस समय डीपीआरओ विनय कुमार सिंह के तबादले के बाद उन्हें अस्थायी रूप से प्रभार दे दिया गया था। बाद में उनका प्रमोशन हो गया और वे डीपीआरओ बन गए। नियमों के मुताबिक प्रमोशन के बाद जिले का बदलाव तय होता है और शासन ने आदेश भी जारी कर दिया लेकिन राजेश चौरसिया ने फर्रुखाबाद की कुर्सी से ऐसा मोह पाल लिया कि अब जाने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शासन ने अभी तक फर्रुखाबाद में किसी नए डीपीआरओ की तैनाती तक नहीं की, और न ही यहां एडीपीआरओ मौजूद है।
शासन के आदेश की इस खुली अवहेलना ने विभागीय अनुशासन की नींव हिला दी है। अफसरशाही की मनमानी इस हद तक पहुंच गई है कि एक महीने बाद भी किसी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं हुई। सवाल यह है कि जब एक ट्रांसफर आदेश को लागू कराने में शासन के हाथ पांव फूल जाएं, तो विभागीय नियंत्रण और अनुशासन की बात कैसे की जा सकती है।जनपद में यह मामला अब अफसरशाही बनाम शासन का प्रतीक बन चुका है, जहां एक अधिकारी का व्यक्तिगत स्वार्थ और कुर्सी प्रेम, पूरे सिस्टम पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।

 

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