लखनऊ। राजधानी के बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में इन दिनों डॉक्टरों की भारी कमी देखने को मिल रही है। सर्दियों की छुट्टियों के चलते करीब 50 प्रतिशत डॉक्टर अवकाश पर चले गए हैं, जिससे KGMU, डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान और पीजीआई की ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन तीनों प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में कुल मिलाकर लगभग 1300 डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन इनमें से करीब 650 डॉक्टर इस समय छुट्टी पर हैं। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों की जांच, इलाज और ऑपरेशन पर पड़ रहा है।
ऑपरेशन और जांच में बढ़ा इंतजार
डॉक्टरों, खासकर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और सर्जनों की कमी के कारण कई निर्धारित ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। मरीजों को जांच और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई विभागों में रोज होने वाले ऑपरेशन की संख्या में भी भारी कमी आई है।
स्थिति यह है कि नए मरीजों को ओपीडी और सर्जरी के लिए फरवरी के बाद की तारीखें दी जा रही हैं। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सीमित स्टाफ के कारण अस्पताल प्रशासन भी दबाव में है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सर्दियों की छुट्टियों का असर जनवरी माह तक जारी रहने की संभावना है। छुट्टियों से लौटने के बाद ही सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो पाएंगी।
इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों की कमी से खासे परेशान हैं। घंटों लाइन में लगने के बावजूद कई मरीजों को बिना जांच के लौटना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की इस स्थिति ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मानव संसाधन प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों को उम्मीद है कि जल्द ही व्यवस्था सुधरेगी और उन्हें समय पर इलाज मिल सकेगा।





