फर्रुखाबाद: जब कड़ाके की ठंड हड्डियों तक कंपकंपी उतार रही थी, जब शहर की सड़कें सन्नाटे में डूबी थीं और प्लेटफॉर्मों (platforms) पर मजबूरी की नींद सोए लोग ठिठुर रहे थे—तब रात जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी (DM Ashutosh Kumar Dwivedi) प्रशासनिक फाइलों से बाहर निकलकर इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आए। शीतलहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूस की ठंडी रात जिलाधिकारी देर रात कृषि उत्पादन मंडी समिति सातनपुर और रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद पहुंचे।
वहां उन्होंने न केवल निरीक्षण किया, बल्कि खुले आसमान के नीचे ठंड से कांप रहे गरीब, जरूरतमंद और निराश्रित लोगों के पास खुद जाकर कंबल ओढ़ाए। किसी ने झिझकते हुए हाथ बढ़ाया, किसी की आंखें भर आईं—क्योंकि उस रात उन्हें सिर्फ कंबल नहीं, सम्मान और अपनापन मिला। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सो रहे बुजुर्ग ने कांपती आवाज में कहा— “बाबू साहब… आज पहली बार लगा कि सरकार हमें भी देखती है।”
जिलाधिकारी ने लोगों का हालचाल जाना, उनसे बातचीत की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि ठंड में कोई भी व्यक्ति खुले में सोने को मजबूर न हो। रैन बसेरों की नियमित जांच, अलाव की पर्याप्त व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंदों को चिन्हित कर समय से कंबल वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी मौके पर ही दिए गए।
डीएम आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि शीतलहर के दौरान प्रशासन लगातार निगरानी रखेगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनपद का कोई भी नागरिक ठंड के कारण पीड़ा न झेले। यह केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है। उस ठंडी रात में जब कई लोग ठंड से लड़ रहे थे, तब जिलाधिकारी का यह कदम जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की गर्माहट बन गया। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने यह संदेश दिया कि प्रशासन केवल आदेशों का नहीं, संवेदनाओं का भी प्रतिनिधि होता है।


