410 आवेदक महीनेभर से इंतजार में

लखनऊ| राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा कामकाज नई कार्यदायी कंपनी को सौंपे जाने के बाद आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। आवेदकों के मोबाइल पर ड्राइविंग लाइसेंस बनने का मैसेज तो पहुंच रहा है, लेकिन स्थायी डीएल की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। प्रिंटिंग और डिस्पैच में देरी के कारण शहर के करीब 410 आवेदक पिछले लगभग एक महीने से अपने ड्राइविंग लाइसेंस का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी हो जाती थी।
डीएल न मिलने से परेशान आवेदक लगातार परिवहन विभाग मुख्यालय और ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ पहुंचने वाले आवेदकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए परिवहन विभाग मुख्यालय भेजा जा रहा है। आवेदक मनीष ने बताया कि मुख्यालय में शिकायत करने पर जानकारी मिली कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस अब तक डिस्पैच ही नहीं हुआ है, जबकि आवेदन स्वीकृत दिखाया जा रहा है।
अब तक ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन की स्क्रूटनिंग से लेकर प्रिंटिंग और डिस्पैच तक की जिम्मेदारी स्मार्ट चिप कंपनी के पास थी। हाल ही में यह कामकाज सिल्वर टच लिमिटेड को सौंपा गया है, लेकिन कंपनी अभी तक व्यवस्था को पूरी तरह संभाल नहीं पाई है। इसी कारण अकेले लखनऊ में सैकड़ों आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस अटके हुए हैं।
नियम के अनुसार डीएल की मंजूरी के बाद कार्ड परिवहन विभाग मुख्यालय भेजे जाते हैं, जहां स्मार्ट कार्ड में डाटा क्लाउड पर अपलोड किया जाता है। इस प्रक्रिया को की-मैनेजमेंट सिस्टम (केएमएस) कहा जाता है। फिलहाल केएमएस से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के चलते डीएल की प्रिंटिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया बाधित हो गई है। विभागीय स्तर पर कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आई है।
अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) सुनीता वर्मा ने बताया कि कार्यदायी संस्था के सुपरवाइजरों को फटकार लगाई गई है और लंबित मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस जल्द से जल्द प्रिंट कर आवेदकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का दावा है कि स्थिति को शीघ्र सामान्य कर लिया जाएगा, लेकिन तब तक आवेदकों की परेशानी बनी हुई है।

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