Lucknow| दिवाली पर घर जाने वालों की भारी भीड़ ने *रेलवे और रोडवेज दोनों के इंतजामों की पोल खोल दी।* रविवार को आगरा, मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में ट्रेनों और बसों में सफर कर रहे यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। स्थिति यह रही कि कई ट्रेनों में *सीट छोड़िए, खड़े होने की जगह तक नहीं थी।* वहीं बसों में भी यात्रियों को छत पर बैठकर सफर करना पड़ा, जिससे यात्रियों की *जान जोखिम में पड़ गई।*
*ईदगाह जंक्शन* पर खड़ी कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस में भीड़ का आलम यह था कि यात्री दरवाजों पर लटके हुए दिखाई दिए। कई यात्रियों ने बताया कि बुकिंग होने के बावजूद वे अपनी सीटों तक नहीं पहुंच पाए। दिव्यांग कोच में सफर कर रहे यात्री रवि ने कहा कि सामान्य यात्री भी इस कोच में बैठे हैं और जब सीट छोड़ने को कहा तो झगड़े पर उतर आए। यही हाल *आगरा कैंट और आगरा फोर्ट स्टेशन* का रहा, जहां 150 से अधिक ट्रेनों के संचालन के बावजूद यात्रियों की भीड़ संभालना मुश्किल हो गया।
वहीं दूसरी ओर, *रोडवेज बसों में भी हालात बेकाबू* रहे। आईएसबीटी और ईदगाह बस स्टैंड पर यात्रियों की इतनी भीड़ उमड़ी कि बसों में चढ़ने के लिए धक्कामुक्की मच गई। कई लोग बस की छतों पर बैठकर रवाना हुए। इटावा, एटा, लखनऊ और सीतापुर की ओर जाने वाली बसों में बैठने की जगह तो दूर, खड़े होने की भी जगह नहीं थी। *रामबाग फ्लाईओवर, अबुल उलाह कट और वाटर वर्क्स चौराहा* यात्रियों से खचाखच भरे रहे, जो देर रात तक बसों का इंतजार करते रहे।
यात्रियों की बढ़ती परेशानी के बीच, *आगरा रेल मंडल की जनसंपर्क अधिकारी प्रशस्ति श्रीवास्तव* ने कहा कि दिवाली जैसे त्योहारों पर सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा भीड़ रहती है। यात्रियों की सुविधा के लिए कई *स्पेशल ट्रेनें* चलाई गई हैं और *जीआरपी-आरपीएफ की टीमें भीड़ नियंत्रण में लगी हैं।* मंडल के वार रूम से लगातार ट्रेनों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उधर, *परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल* ने बताया कि त्योहार के मद्देनज़र *747 बसों का संचालन* किया जा रहा है और सभी प्रमुख मार्गों पर *25 प्रतिशत अतिरिक्त फेरे* बढ़ाए गए हैं। स्टेशन प्रभारी और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को बस स्टैंडों पर तैनात किया गया है। बावजूद इसके, यात्रियों की संख्या इतनी अधिक है कि इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। दिवाली की इस रौनक में घर पहुंचने की चाह रखने वालों के लिए सफर बेहद थकाऊ और जोखिमभरा बन गया है।





