– दो चरणों में होगी जनगणना, डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर सरकार का जोर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना (national census) के लिए अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है। यह जनगणना ऐतिहासिक होगी क्योंकि भारत में पहली बार पूरे देश की गणना पूरी तरह डिजिटल (Digital) माध्यम से की जाएगी। सरकार ने इस विशाल अभियान के लिए ₹11,718 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार डिजिटल जनगणना से आंकड़े ज्यादा सटीक, समयबद्ध और सुरक्षित उपलब्ध हो सकेंगे तथा पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार ने साफ़ किया है कि जनगणना दो प्रमुख चरणों में आयोजित की जाएगी— गृह सूचीकरण, जनसंख्या गणना। इस बार गणनाकार मोबाइल टैब या डिजिटल उपकरणों के जरिये सीधे डेटा केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करेंगे। इससे कागज़ आधारित फॉर्म की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी।
डिजिटल डेटा संरक्षण के लिए विशेष एन्क्रिप्शन प्रणाली लागू की जाएगी, ताकि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे। देशभर में लाखों गणनाकारों को डिजिटल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे गणना प्रक्रिया सुचारु रहे। सरकार का कहना है कि डिजिटल जनगणना से विकास योजनाओं का लक्ष्य निर्धारण तेज़ होगा, संसाधन वितरण अधिक न्यायसंगत होगा,और सामाजिक-आर्थिक आंकड़े कम समय में उपलब्ध हो सकेंगे।
भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण स्थगित हो गई थी। अब 2027 की जनगणना को देश की सबसे बड़ी डिजिटल डेटा परियोजना माना जा रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस जनगणना के परिणाम आने वाले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, शहरी विकास और आर्थिक योजना निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।


