लखनऊ| गोमतीनगर निवासी वरिष्ठ नागरिक राजेंद्र प्रकाश वर्मा को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 54.60 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने चार जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जो म्यूल खातों के जरिए ठगी की रकम मंगवाकर क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेश भेजते थे। गिरोह का सरगना थाईलैंड में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि 13 दिसंबर को जालसाजों ने खुद को एनआईए और एटीएस का अधिकारी बताकर राजेंद्र प्रकाश वर्मा को फोन किया और उन पर आतंकियों को फंडिंग करने का झूठा आरोप लगाया। जांच के नाम पर उन्हें धमकाते हुए सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित से इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के दो खातों में कुल 54.60 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
पीड़ित राजेंद्र प्रकाश ने 19 दिसंबर को साइबर क्राइम थाने में रंजीत कुमार और प्रेम कुमार गौतम नामक दो जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था और उनके मोबाइल नंबर भी पुलिस को सौंपे थे। जांच में सामने आया कि ठगी की पूरी रकम म्यूल खातों में जमा कराई गई थी और बाद में खातों से निकालकर आगे ट्रांसफर कर दी गई।
सर्विलांस और बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर मंगलवार को साइबर क्राइम सेल की टीम ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए जालसाजों में वजीरगंज निवासी मोहम्मद सुफियान, दुबग्गा निवासी मोहम्मद आजम, गुडंबा निवासी आरिफ इकबाल और मदेयगंज निवासी उजैर खान शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से पांच मोबाइल फोन, 25,234 रुपये नकद, पांच डेबिट कार्ड, एक पैन कार्ड और एक आधार कार्ड बरामद किया है।
डीसीपी के मुताबिक यह गिरोह कुल 12 लोगों का है। ठगी की रकम म्यूल खातों में मंगवाकर कमीशन काटने के बाद क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश में बैठे सरगना को भेज दी जाती थी। गिरोह के कुछ सदस्य बहराइच और श्रावस्ती के निवासी बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। साथ ही म्यूल खाताधारकों की भूमिका की भी जांच चल रही है।
पुलिस ने बताया कि म्यूल खाता वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल असली खाताधारक नहीं बल्कि साइबर जालसाज करते हैं। आरोपी रुपये का लालच देकर कम पढ़े-लिखे और कमजोर वर्ग के लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम से खाते खुलवाते हैं और फिर पासबुक, चेकबुक व डेबिट कार्ड अपने पास रखकर ठगी की रकम मंगवाने में उनका इस्तेमाल करते हैं।

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