डिजिटल अरेस्ट से लेकर फर्जी केवाइसी तक: छह माह में करोड़ों की साइबर ठगी, पुलिस ने दी सतर्क रहने की सलाह

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लखनऊ : राजधानी और आसपास के इलाकों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’, केवाइसी अपडेट, इनकम टैक्स नोटिस, बिजली बिल भुगतान, लोन एप, फर्जी कूरियर पार्सल और ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब जैसे बहानों से अपराधी लोगों को ठग रहे हैं। बीते छह महीनों में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। साइबर क्राइम थाना और साइबर सेल लगातार जांच और कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन जालसाज नए-नए तरीके अपनाकर लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।

सबसे गंभीर मामले ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मिल रहे हैं। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या एनआईए अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को घंटों डराते हैं। नकली कार्यालय, वर्दी और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर मानसिक दबाव बनाया जाता है, फिर बैंक अकाउंट और व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है। राजाजीपुरम निवासी पूर्व रेलवे अफसर और शिक्षक से इसी तरीके से 30.57 लाख रुपये ठगे गए। साइबर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 6.5 लाख रुपये फ्रीज करा लिए, लेकिन बाकी रकम अब भी ट्रांजिट खातों में फंसी है।

अलीगंज निवासी एक महिला बैंक कर्मचारी के खाते से फर्जी केवाइसी के नाम पर 4.25 लाख रुपये उड़ा दिए गए। छह महीने बाद भी रकम वापस नहीं मिली और परिवार पर कर्ज का भार बढ़ गया। वहीं, एक इंजीनियरिंग छात्र को ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर 1.8 लाख रुपये गंवाने पड़े। इंदिरानगर निवासी आनंद राय के साथ एक परिचित के नाम पर कॉल कर बीमारी का बहाना बनाकर 2.5 लाख रुपये की ठगी की गई। ऐसे सैकड़ों मामले रोज साइबर थाने की फाइलों में जुड़ते जा रहे हैं, जिनमें पीड़ित अब भी अपनी रकम वापस पाने के लिए भटक रहे हैं।

गोमतीनगर निवासी रूप कुमार शर्मा को भी एक संदिग्ध लिंक भेजा गया था, लेकिन उन्होंने सतर्कता बरतते हुए उसे न खोलकर खुद को ठगी से बचा लिया। इसके बाद उन्होंने परिचितों को सतर्क रहने की अपील भी की।

पुलिस उपायुक्त अपराध कमलेश दीक्षित ने साफ कहा कि डर और लालच ही साइबर अपराधियों के सबसे बड़े हथियार हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी एजेंसियां कभी भी व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं अपनातीं। अगर किसी कॉलर द्वारा आधार, ओटीपी, बैंक डिटेल या स्क्रीन शेयरिंग मांगी जाती है, तो तुरंत कॉल काट दें।

कैसे बचें साइबर ठगी से:

किसी भी अनजान लिंक या ऐप को बिल्कुल डाउनलोड न करें।

बिजली बिल, टैक्स या बैंक संबंधी संदेशों का सत्यापन केवल आधिकारिक वेबसाइट से करें।

ऑनलाइन नौकरी या निवेश के नाम पर बिना पुष्टि किए पैसे न भेजें।

ठगी होते ही 1930 या www.cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत करें। देरी होने पर रकम वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही एकमात्र बचाव है। सतर्कता से कई बड़ी ठगी रोकी जा सकती है और समय पर शिकायत से कई बार पूरी रकम भी वापस मिल सकती है।

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