कहा धार्मिक पद को राजनीति का औजार नहीं बनने दिया जाएगा, गौकशी पर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवाद और गौकशी के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पद सरकार नहीं बांटती और न ही किसी विवादित दावे को सरकारी मान्यता दी जाती है।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद झूठे बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि
“गौकशी का काम जिनके आका किया करते थे, वही आज दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं।”
मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में गौकशी पूरी तरह प्रतिबंधित है और योगी सरकार के सत्ता में आते ही हजारों अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई की गई।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि
“यूपी से केवल सुअर, भैंस और बकरे का मीट एक्सपोर्ट किया जाता है। गौमांस का निर्यात पूरी तरह प्रतिबंधित है।”
उन्होंने कहा कि गौकशी को लेकर सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है और इसमें किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती।
मंत्री ने दो टूक कहा कि
“शंकराचार्य कोई सरकारी नियुक्ति नहीं है, न ही यह कोई संवैधानिक पद है। सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती।”
उन्होंने कहा कि यह विषय मठों, परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं का है। सरकार का काम केवल कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना है।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि योगी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि
“धार्मिक पद को राजनीति का औजार नहीं बनने दिया जाएगा।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक पद की आड़ में भ्रम फैलाने या कानून तोड़ने का प्रयास करता है, तो उसे सरकारी मान्यता या संरक्षण नहीं मिल सकता।
अविमुक्तेश्वरानंद को मान्यता नहीं
मंत्री ने स्पष्ट किया कि
“सरकार ने अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना है और न ही किसी आधिकारिक मंच से उन्हें मान्यता दी है।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कानून तोड़ने की छूट किसी को नहीं है, चाहे वह किसी भी धार्मिक पद का दावा करता हो।
गौ संरक्षण पर सरकार का फोकस
धर्मपाल सिंह ने बताया कि योगी सरकार ने गौ संरक्षण के लिए अलग से बजट आवंटित किया है,प्रदेश भर में गौशालाएं बनवाई गई हैं,और निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए योजनाएं लागू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस विवाद से दूरी बनाकर व्यवस्था और कानून पर ध्यान देने का है।
मंत्री के इस बयान के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहा विवाद और अधिक सियासी व वैचारिक रूप से गरमा गया है।






