गाजा पट्टी में संघर्ष विराम लागू होने के बाद भी जमीनी हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। ताजा घटनाक्रम में इस्राइली गोलीबारी और हमलों में कम से कम 19 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई है। मरने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है, जिससे संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल अधिकारियों ने इन मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों में मासूम बच्चे और नवजात शिशु भी शामिल हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और अस्पतालों पर लगातार बढ़ते दबाव के कारण इलाज में भी मुश्किलें आ रही हैं। गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही सीमित संसाधनों के कारण जूझ रही है।
इस्राइल की ओर से इन हमलों को लेकर सफाई दी गई है। इस्राइली सेना का कहना है कि गाजा में तैनात उसके सैनिकों पर पहले उग्रवादियों ने गोलीबारी की थी, जिसमें एक रिजर्व सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना के मुताबिक, इसी के जवाब में हवाई और जमीनी यूनिट्स के जरिए कार्रवाई की गई।
इस्राइली सेना ने इसे संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करार दिया है और कहा है कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए जवाबी फायरिंग जरूरी थी। हालांकि, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में आम नागरिकों की मौत चिंता का विषय है और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों में कम से कम सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। मृतकों में पांच महीने का एक शिशु और सिर्फ दस दिन की एक बच्ची भी शामिल है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 530 से ज्यादा फलस्तीनी इस्राइली हमलों में मारे जा चुके हैं।
गाजा सिटी के शिफा अस्पताल के निदेशक ने कहा कि क्षेत्र में हालात अब भी युद्ध जैसे बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संघर्ष विराम लागू है, तो आम लोगों को अब भी जान गंवानी क्यों पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि लगातार हमलों के कारण लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
हमलों की बात करें तो उत्तरी गाजा के तुफ्फाह इलाके में एक इमारत पर हुई फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई। इनमें एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल थे। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया और कई परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए।
दक्षिणी गाजा के खान यूनिस शहर में एक परिवार के टेंट पर हुए हमले में तीन लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 12 साल का लड़का भी शामिल था। वहीं गाजा सिटी के ज़ैतून इलाके में टैंक शेलिंग से तीन और लोगों की मौत हुई, जिनमें पति-पत्नी भी शामिल बताए गए हैं।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 71,800 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय लड़ाकों और आम नागरिकों के आंकड़ों को अलग-अलग नहीं करता, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और कई स्वतंत्र विशेषज्ञ इन आंकड़ों को आमतौर पर भरोसेमंद मानते हैं।
लगातार बढ़ती मौतों और हिंसा की घटनाओं ने संघर्ष विराम की वास्तविकता पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बार फिर दोनों पक्षों से संयम बरतने और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील कर रहा है, ताकि गाजा के आम नागरिकों को इस लगातार जारी त्रासदी से राहत मिल सके।


