कानपुर| दिल्ली धमाके के मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है। एजेंसियों को शाहीन के सात बैंक खातों का पता चला है, जिनमें तीन कानपुर, दो लखनऊ और दो दिल्ली के बैंक शामिल हैं। इन सभी खातों के लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। जांच टीम का मानना है कि खातों में लेनदेन करने वालों का पता चलने पर उसके नेटवर्क को समझने में बड़ी सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही जनवरी से अक्तूबर 2025 तक शाहीन कितनी बार जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर आई, किससे मिली और कहां रुकी—इन सभी बिंदुओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसियों ने उसके संभावित आर्थिक सहयोगियों की खोज भी शुरू कर दी है। एजेंसियों का अनुमान है कि शाहीन लंबे समय तक कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में रही है, लिहाजा उसके संपर्क में ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो आतंकी संगठन को आर्थिक मदद देते रहे हों। इसी कारण प्रयागराज में मेडिकल पढ़ाई के दौरान उसके साथ पढ़ने वाले छात्रों का रिकॉर्ड भी एकत्र किया जा रहा है। शाहीन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग की एचओडी रही थी। सहकर्मियों के अनुसार वह कम छुट्टियां लेती थी और बच्चा लेकर अस्पताल आती थी। उसने मेडिकल कॉलेज के एल ब्लॉक में आवास भी लिया था और सामान्य महिला फैकल्टी की तरह काम करती थी। 2013 में अचानक गायब होने के बाद 2021 में उसकी बर्खास्तगी की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि शाहीन की तरह मेडिकल कॉलेज के सात और डॉक्टर भी पिछले वर्षों में लापता होकर बर्खास्त किए गए थे। अब सुरक्षा एजेंसियां इन सातों डॉक्टरों की भी जांच कर रही हैं, जिनमें सर्जरी विभाग के तीन डॉक्टर शामिल हैं। सभी के व्यवहार, नोटिस, बर्खास्तगी के दस्तावेज, वर्तमान लोकेशन और उनसे संबंध रखने वालों की जानकारी खंगाली जा रही है। इस सूची में डॉ. हिफजुल रहमान, डॉ. हामिद अंसारी, डॉ. विभुद प्रताप सिंह, डॉ. समता गुप्ता, डॉ. निसार अहमद अंसारी, डॉ. परवेज अहमद और डॉ. श्रवण प्रताप सिंह यादव शामिल हैं। शाहीन का नेटवर्क तलाशने के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाने वाले एनजीओ की भी जांच की जा रही है। इन एनजीओ के खातों में आने वाले फंड और गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही शहर में गर्म कपड़े और मेवा बेचने के लिए आने वाले कश्मीरियों का भी सत्यापन हो रहा है, जिनमें से 31 लोग संवेदनशील इलाकों में किराये पर रहते पाए गए हैं।
जांच में शाहीन के भाई डॉ. परवेज की भूमिका भी सामने आ रही है। परवेज की कानपुर में ससुराल है और वह चमनगंज व बेकनगंज जैसे संवेदनशील इलाकों में कुछ आयोजनों में शामिल होता रहा है। एजेंसियों को शक है कि वह इन इलाकों में नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। अब जांच एजेंसियां उसके शहर आने-जाने, संपर्कों और गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।






