नई दिल्ली| सुबह एक बार फिर भारी और दमघोंटू धुंध से ढकी नजर आई, जिसने राजधानी को पिछले एक सप्ताह से अपनी गिरफ्त में ले रखा है। हल्की सर्दी के बीच ठहरी हुई हवा और आसमान पर छाए धुएं के भूरे पर्दे ने शहर की सांसें और अधिक बोझिल कर दी हैं। जैसे ही लोग सुबह बाहर निकले, हवा में घुले ज़हर ने तुरंत अपना असर दिखाया—आंखों में चुभन, गले में जलन और सांसों में भारीपन साफ महसूस हुआ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गुरुवार को 400 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी की सीमा पर है। शुक्रवार सुबह हालात और खराब हो गए और AQI 400 के पार चला गया। यह लगातार सातवां दिन है जब दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ स्तर में बनी हुई है और सुधार की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा का बहाव बेहद धीमा हो गया है। प्रदूषक हवा में फैलने के बजाय शहर के ऊपर ही जमा हो रहे हैं। धीमी हवा, गिरता तापमान और आसपास के क्षेत्रों में जल रही पराली ने मिलकर दिल्ली को जहरीली धुंध की मोटी चादर में ढक दिया है। कई इलाकों में सुबह इतनी घनी धुंध थी कि सड़कें और आसमान दोनों एक ही रंग के दिखाई दिए।
प्रदूषण बढ़ने के साथ ही लोग फिर से मास्क पहनने को मजबूर हो गए हैं। कई लोग रूमाल और स्कार्फ से चेहरा ढककर घरों से बाहर निकले। कुछ लोगों ने बताया कि सुबह बाहर निकलते ही आंखों में जलन शुरू हो गई, जबकि कई को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई।
अस्पतालों में भी सांस, एलर्जी और आंखों से जुड़े संक्रमणों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थिति में बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं, इसलिए बेवजह घर से निकलने से बचना चाहिए और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने चाहिए।





