संभल
जामा मस्जिद से सटी कब्रिस्तान की जमीन पर बने कथित अवैध निर्माण को हटाने की प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकती है। सिविल कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर पहले लगाए गए स्टे को खारिज कर दिया है, जिससे लंबे समय से चल रहा कानूनी गतिरोध समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
यह पूरा मामला कोतवाली क्षेत्र में स्थित करीब 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि इस भूमि पर कुछ स्थानों पर मकान और दुकानों का निर्माण किया गया है, जिससे कब्रिस्तान की जमीन के उपयोग और सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
इस विवाद को लेकर जिला प्रशासन को एक शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इसी क्षेत्र की छतों से सर्वे टीम और पुलिस पर पथराव की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और पैमाइश की प्रक्रिया शुरू की।
प्रशासन ने 30 दिसंबर 2023 को इस जमीन की विस्तृत पैमाइश कराई थी, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके। इस कार्रवाई के बाद कुछ प्रभावित लोगों ने आपत्ति जताते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली और मामला आगे बढ़ता रहा।
इसके बाद यह मामला तहसील कोर्ट में वापस भेज दिया गया, जहां सुनवाई जारी है। प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद कब्जेदारों ने सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर स्टे प्राप्त कर लिया था, जिससे कार्रवाई अस्थायी रूप से रुक गई थी।
अब सिविल कोर्ट द्वारा स्टे हटाए जाने के बाद प्रशासन के लिए रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अंतिम निर्णय तहसील कोर्ट के आदेश के बाद ही लिया जाएगा, जिसके बाद अवैध निर्माण हटाने की औपचारिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।


