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Wednesday, April 1, 2026

दरवाजे पर बैठी थी मौत: घर में घुसी काली नागिन से मची दहशत

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प्रवीन कुमार, जिला संवाददाता
इटावा। गर्मी की शुरुआत के साथ ही सांपों की बढ़ती सक्रियता अब खतरे की घंटी बनती नजर आ रही है। थाना सिविल लाइन्स क्षेत्र के कोठी विचारपुर गांव में सोमवार देर रात एक ऐसा ही खौफनाक वाकया सामने आया, जब एक घर के दरवाजे के पास रखी बोरी के पीछे अचानक काली नागिन नजर आई। नागिन को देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे घर में दहशत फैल गई।
परिजनों ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए ग्रामीण आयुष के माध्यम से स्नेक बाइट हेल्पलाइन 7017204213 पर संपर्क किया। सूचना मिलते ही सर्पमित्र एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और हालात को संभालते हुए बेहद सावधानी और पेशेवर तरीके से नागिन का सफल रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान आसपास मौजूद ग्रामीणों की सांसें थमी रहीं, लेकिन विशेषज्ञ की तत्परता से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। बाद में इस खतरनाक नागिन को सामाजिक वानिकी विभाग, इटावा के दिशा-निर्देशन में उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
स्पेक्टिकल कोबरा: एक डंस और जिंदगी खत्म!
डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि यह स्पेक्टिकल कोबरा (नाग) प्रजाति की मादा थी, जिसका जहर बेहद खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक होता है। इसके दंश से शरीर का नर्वस सिस्टम तेजी से प्रभावित होता है और समय पर इलाज न मिलने पर मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने खासतौर पर रात के समय ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी।

सर्पदंश के बाद क्या करें — जान बचाने वाले 3 कदम
✓ घबराएं नहीं, मरीज को शांत रखें
प्रभावित स्थान पर हल्का बंध लगाएं (टाइट नहीं)
✓ 1 घंटे के अंदर नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
✓ जिला अस्पताल इटावा (इमरजेंसी वार्ड, कमरा नं. 3)
✓ सैफई पीजीआई (इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध)

झाड़-फूंक = मौत का न्योता
डॉ त्रिपाठी ने साफ कहा कि अंधविश्वास में पड़कर झाड़-फूंक कराना सीधे जान जोखिम में डालना है। हर साल ऐसे मामलों में देरी से इलाज के कारण जानें जाती हैं।
वही अब जागरूकता की जीत होती दुख रही है अब लोग नहीं मारते सांप
डॉ. आशीष ने बताया कि संस्था “ओशन” के सर्पदंश जागरूकता अभियान के चलते अब जनपद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सर्पदंश से मौत के मामलों में कमी, लोगों में वैज्ञानिक सोच का विकास, सांपों को मारने के बजाय रेस्क्यू के लिए कॉल, यह बदलाव पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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