बरेली। शहर में खुले नालों की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। सेटेलाइट बस अड्डे पर एक युवक की नाले में गिरकर मौत के बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। शहर के कई हिस्सों में गहरे और खुले नाले बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मौजूद हैं, जो हर दिन हजारों लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। हादसे के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सेटेलाइट बस अड्डा, जहां रोजाना 30 से 35 हजार यात्रियों का आवागमन होता है, वहां खुले नाले ने एक युवक की जान ले ली। करीब 30 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव को बाहर निकाला जा सका। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुरक्षा इंतजामों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
शहर के अन्य इलाकों की स्थिति भी चिंताजनक है। लल्ला मार्केट रोड, चौपुला पुल से किला पुल तक और नई बस्ती प्रेमनगर जैसे क्षेत्रों में कई जगह नाले खुले पड़े हैं। इन स्थानों पर न तो चेतावनी संकेत लगे हैं और न ही नालों को ढकने के लिए स्लैब डाले गए हैं। स्कूलों और रिहायशी इलाकों के पास खुले नालों के कारण बच्चों और स्थानीय लोगों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ रहा है।
नई बस्ती के वार्ड-2 जाटवपुरा क्षेत्र में स्थिति और भी खराब है। यहां नालों के पास कोई चेतावनी बोर्ड नहीं है, जिससे अनजान लोग आसानी से हादसे का शिकार हो सकते हैं। साथ ही, नालों के खुले होने के कारण लोग उनमें कूड़ा डाल रहे हैं, जिससे बदबू और गंदगी की समस्या बढ़ती जा रही है और आसपास के लोग परेशान हैं।
रोडवेज अधिकारियों ने नगर निगम को कई बार पत्र लिखकर नालों की सफाई और उन्हें ढकने की मांग की, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों के अनुसार, पहले स्लैब हटाए गए लेकिन उन्हें दोबारा नहीं लगाया गया, जिससे खतरा और बढ़ गया। कई बार चेतावनी देने के बावजूद लापरवाही जारी रही।
नगर आयुक्त ने दावा किया है कि गहरे नालों के पास संकेतक लगाए जाएंगे और उन्हें स्लैब से ढका जाएगा। कुछ स्थानों पर काम शुरू होने की बात भी कही गई है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या समय रहते स्थिति को सुधारा जाएगा।


