कानपुर
पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी रेउना थाना क्षेत्र के रठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मनपुर, बड़ेला और आदिगांव गांवों के रहने वाले हैं, जो अब साइबर अपराध का गढ़ बन चुके हैं। लगातार बढ़ती ठगी की घटनाओं के चलते इस इलाके को ‘यूपी का जामताड़ा’ कहा जाने लगा है।
पुलिस के अनुसार, इन गांवों में संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चल रहा था, जहां 5वीं पास से लेकर 12वीं फेल तक के युवक इस अवैध धंधे में शामिल थे। आरोपी फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड खरीदते और एयरटेल पेमेंट्स बैंक व फिनो पेमेंट्स बैंक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खाते खोलते थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर के लोगों से ठगी करने में किया जाता था।
ठगों का तरीका बेहद चालाकी भरा था। वे लोगों को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताते और कहते कि आप पोर्न वेबसाइट देख रहे हैं, आपकी लोकेशन ट्रेस हो चुकी है। फिर डर और दबाव बनाकर केस खत्म करने के नाम पर पैसे वसूलते थे। एक दिन में करीब 50 लोगों को कॉल कर 5-6 लोगों को अपना शिकार बनाते थे और उनसे UPI के जरिए रकम ऐंठते थे।
इस गिरोह की खास बात यह थी कि ये खास टारगेट चुनते थे—सरकारी कर्मचारी, रिटायर्ड लोग और मध्यम आयु वर्ग के व्यक्ति। यहां तक कि इन्होंने एक पुलिसकर्मी को भी नहीं छोड़ा और उससे करीब 40 हजार रुपये ठग लिए। मोबाइल नंबर जुटाने के लिए ये अलग-अलग वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते थे और फिर सुनियोजित तरीके से लोगों को जाल में फंसाते थे।
पुलिस के लिए इस गिरोह तक पहुंचना आसान नहीं था। कार्रवाई के दौरान गांव की महिलाएं आरोपियों को बचाने के लिए सामने आ जाती थीं। इसके बाद पुलिस ने रणनीति बदलते हुए करीब 3 महीने तक गुप्त जांच की। ड्रोन कैमरों से निगरानी और सिविल ड्रेस में रेकी के बाद 6 अप्रैल को बड़े स्तर पर छापेमारी की गई और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और इससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। रघुवीर लाल के अनुसार, इस बार आरोपियों पर सख्त धाराओं में कार्रवाई की जा रही है ताकि वे जल्दी जमानत पर बाहर न आ सकें। साथ ही बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, जिससे इस साइबर ठगी के पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सके।


