एसटीएफ ने अमित यादव को वाराणसी से दबोचा
लखनऊ| प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कई आरोपियों की सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं, लेकिन इस पूरे प्रकरण में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की संपत्तियों पर अब तक ठोस कार्रवाई न होने से चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों के अनुसार, सुल्तानपुर रोड स्थित आलोक सिंह की आलीशान कोठी और अन्य अचल संपत्तियों के संबंध में जांच एजेंसियों को पर्याप्त जानकारी होने के बावजूद अब तक उन्हें जब्त नहीं किया गया है। अधिकारियों की ओर से लगातार कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। यही वजह है कि इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल है, जिसकी वाराणसी में स्थित संपत्तियों सहित उसके पिता भोला जायसवाल और अन्य आरोपियों की 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। लेकिन आलोक सिंह और उसके करीबी अमित सिंह उर्फ ‘टाटा’ की संपत्तियों की जांच में अब तक कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है। आलोक को कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का करीबी बताया जाता है, और इसी कारण से उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई में देरी की चर्चा भी तेज हो गई है।
इस बीच, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार को वाराणसी से अमित यादव को गिरफ्तार किया है। अमित यादव को शुभम जायसवाल का करीबी सहयोगी माना जा रहा है। एजेंसियों के अनुसार, वह इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और एक लाख से अधिक बोतलों की कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी में उसकी संलिप्तता सामने आई है। अब एसटीएफ उसे रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
गौरतलब है कि अमित यादव समाजवादी युवजन सभा का प्रदेश सचिव भी रह चुका है। उसके खिलाफ लखनऊ और वाराणसी में चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से तस्करी के इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
पूरे प्रकरण में जहां एक ओर कुछ आरोपियों की संपत्तियों पर सख्त कार्रवाई कर सरकार ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर आलोक सिंह की संपत्तियों पर अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि एसआईटी और ईडी आगे क्या रुख अपनाती हैं और क्या सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई हो पाती है या नहीं।






