लखनऊ| कफ सिरप की अवैध सप्लाई से जुड़े करोड़ों के सिंडिकेट का जाल अब और गहराई तक सामने आने लगा है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की जा रही कार्रवाई के दौरान खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क में केवल कारोबारी और सप्लायर ही नहीं, बल्कि STF का बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह भी अहम भूमिका निभा रहा था। बताया जा रहा है कि आलोक सिंह इस नेटवर्क का वह व्यक्ति था जो स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चैन तक सभी कड़ियों को जोड़ता था।
सूत्रों के अनुसार, जांच में पहली बार यह पुख्ता हुआ है कि मुख्य आरोपी अमित टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह कई बार दुबई की यात्राएं कर चुके हैं। दुबई में उनकी मुलाकात एबॉट कंपनी के अधिकारियों से हुई, जहाँ कफ सिरप की अवैध आपूर्ति, बड़े सौदे और खेपों की रूटिंग पर चर्चाएं होती थीं। टीम को दुबई यात्रा का पूरा रिकॉर्ड, टिकट और होटल बुकिंग की जानकारी भी मिल चुकी है, जिसे अब डिजिटल एविडेंस के तौर पर खंगाला जा रहा है।
जांच में यह भी संदेह जताया जा रहा है कि दुबई की बैठकों में केवल अवैध कफ सिरप की सप्लाई ही नहीं बल्कि इसकी ओवरसीज़ रूटिंग, विदेशी फंडिंग और हवाला चैनल के जरिए पैसे के लेनदेन की रणनीतियाँ भी तय की जाती थीं। STF को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल यूपी ही नहीं, बल्कि दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और बिहार तक फैला हुआ है, जहाँ से कफ सिरप की अवैध खेप ट्रकों और प्राइवेट कंटेनरों के जरिए भेजी जाती थी।
सूत्र बताते हैं कि आलोक सिंह ने पुलिस सेवा में रहते हुए बनाए गए अपने संपर्कों का खुलकर इस्तेमाल किया। उसने न केवल स्थानीय थोक दवा बाजारों में सक्रिय एजेंट तैयार किए, बल्कि अवैध माल की ढुलाई में लगे ड्राइवरों और मिडिलमैन को भी सुरक्षा का आश्वासन दिलाया। इस्तीफा देने या बर्खास्त होने के बाद उसने एक फर्जी नाम से फर्म भी रजिस्टर करवाई, जिसके जरिए करोड़ों के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए गए। STF अब इस फर्म के बैंक खातों, जीएसटी दस्तावेजों और विदेशी लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
STF अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की प्रारंभिक जांच के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि यह सिंडिकेट चिकित्सा क्षेत्र की आड़ में बड़े पैमाने पर नशे के दुरुपयोग से जुड़े अवैध व्यापार को अंजाम दे रहा था। टीम ने कई व्हाट्सऐप चैट, ईमेल संवाद और विदेशियों से हुई ऑनलाइन मीटिंग्स के प्रमाण भी बरामद किए हैं। इनमें सप्लाई शेड्यूल, कोडवर्ड, भुगतान की तारीखें और रूट का उल्लेख मिलता है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिनमें बिजनेसमैन, मेडिकल होलसेलर और संभवत: कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। STF ने कई संदिग्ध व्यक्तियों को नोटिस भेजा है और जल्द ही कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए टीम को तेज कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।




