जौनपुर। कोडिन युक्त कफ सिरप की तस्करी मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और खाद्य एवं औषधि विभाग की संयुक्त जांच में यह सामने आया है कि जिन 12 फर्म संचालकों पर अब तक प्राथमिकी दर्ज की गई है, वे असल बिक्री के बिना सिर्फ बिलिंग के नाम पर हर माह एक-एक लाख रुपये तक का कमीशन लेते थे। जांच अधिकारी इसे एक बड़ी संगठित अवैध सप्लाई चेन का हिस्सा बता रहे हैं।
जांच में उजागर हुआ कि सभी फर्म संचालक झारखंड, रांची स्थित शैली ट्रेडर्स से 100-100 एमएल की शीशियों में कफ सिरप की खरीद दिखाते थे। दस्तावेजों के अनुसार, 42.45 करोड़ रुपये की कीमत की 18 लाख 90 हजार शीशियों की खरीद और आसपास के जिलों—वाराणसी, चंदौली, प्रतापगढ़, गाजीपुर, आजमगढ़—में बिक्री दिखायी गई है। जबकि वास्तविकता में न तो सिरप खरीदा गया और न बेचा गया; पूरा खेल सिर्फ कागजी बिलिंग पर आधारित था।
जांच में शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद और उनके बेटे शुभम जायसवाल को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना बताया गया है, जो 2023 से दवा कारोबारियों को अपने जाल में फंसाते रहे हैं। लालच में आकर कई स्थानीय कारोबारी नेटवर्क से जुड़ गए। विभाग की ओर से 12 फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि कुल 15 के नाम सामने आ चुके हैं।
सबसे अधिक खपत दिखाने वाली ढालगर टोला स्थित पूर्वांचल एसोसिएट है, जिसके संचालक अंकित श्रीवास्तव ने 4.60 लाख शीशियों की बिक्री वाराणसी, चंदौली और आजमगढ़ की कई एजेंसियों को दिखायी। जांच में सामने आया कि असल में यह कोडिनयुक्त सिरप गैर-चिकित्सकीय नशे के रूप में बेचा गया।
कई फर्मों के पते पर जांच में दवा दुकानें नहीं बल्कि रेस्टोरेंट और होटल संचालित पाए गए। कई फर्म वर्षों से बंद मिलीं, लेकिन कागजों पर भारी मात्रा में सिरप की खरीद-बिक्री होती दिखाई गई है। मुरादगंज की श्री मेडिकल एजेंसी बंद मिली, पर रिकॉर्ड में 55 हजार शीशियों की खपत दर्शाई गई।
ढालगर टोला स्थित मिलन ड्रग सेंटर, बलुआघाट स्थित मिलन मेडिकल एजेंसी, हर्ष मेडिकल एजेंसी, स्टार इंटरप्राइजेज, बद्रीनाथ फार्मेसी एंड सर्जिकल समेत कई दुकानों से लाखों शीशियों की बिलिंग की गई, जबकि मौके पर एक भी शीशी स्टॉक में नहीं मिली। प्रतापगढ़, मिर्जापुर, आजमगढ़, वाराणसी और चंदौली को बड़ी मात्रा में खपत दिखाना जांच टीम के मुताबिक केवल कागजी खेल था।
जांच में यह भी सामने आया कि दो महिला संचालक—महेरून निशा (एसएन मेडिकल एजेंसी) और अनुप्रिया सिंह (शौकुश्य फार्मा)—भी इस अवैध खेल में शामिल थीं। दोनों फर्मों पर भी कोडिनयुक्त कफ सिरप की हजारों शीशियों की कागजी खपत दिखाई गई।
जांच टीम के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सिर्फ कागज पर खरीद-बिक्री दिखाकर भारी कमीशन कमाने और कोडिनयुक्त कफ सिरप को नशे के तौर पर बाजार में खपाने का एक बड़ा गिरोह है। पुलिस तकनीकी सर्विलांस और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है, जिसके आधार पर और नाम जुड़ने की संभावना है। अधिकारी मान रहे हैं कि यह प्रदेश में कफ सिरप तस्करी का अब तक का सबसे बड़ा मामला हो सकता है।




