फर्रुखाबाद। न्यायालय के आदेशों की अनदेखी एक पुलिस अधिकारी को भारी पड़ गई। जनपद में एसीजेएम न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कोतवाली प्रभारी दर्शन सिंह सोलंकी को न्यायिक आदेशों की अवहेलना का दोषी मानते हुए 7 दिन के साधारण कारावास की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे न्यायिक अनुशासन का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
मामला एक पुराने आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) और अन्य निर्देशों का समय पर पालन नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, अदालत को निर्धारित समय सीमा में कोई संतोषजनक आख्या भी प्रस्तुत नहीं की गई। न्यायालय ने इसे साधारण चूक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना माना।
न्यायालय के आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को संबंधित थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर 3 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, न तो अधिकारी न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही किसी प्रकार का स्पष्टीकरण दिया गया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि नोटिस की जानकारी व्हाट्सएप और फोन कॉल के माध्यम से भी दी गई थी, फिर भी अनुपस्थिति को जानबूझकर की गई अवहेलना माना गया।
सुनवाई के दौरान पैरोकार कांस्टेबल के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आदेशों की विधिवत तामीला कराई गई थी, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस अधिकारी ही न्यायिक आदेशों की अनदेखी करेंगे, तो कानून व्यवस्था की नींव कमजोर हो जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी कोतवाली प्रभारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है कि संबंधित अधिकारी को गिरफ्तार कर 6 अप्रैल 2026 तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
अदालत की सख्ती: कोतवाली प्रभारी को 7 दिन की सजा, गिरफ्तारी के आदेश से हड़कंप


