राजस्व परिषद के स्थगन आदेश को ठेंगा दिखाकर इंडियन ऑयल अधिकारी ने किया कानून पर हमला
फर्रुखाबाद। जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव अदमापुर में जमीन के बंटवारे को लेकर चल रहा पुराना विवाद अब खुली चुनौती का रूप ले चुका है। गांव निवासी जवाहरलाल और उनके भाई रामवीर के बीच यह भूमि विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के सदस्य संजय कुमार की अदालत ने स्पष्ट स्थगन आदेश जारी करते हुए स्थिति यथावत रखने के कड़े निर्देश दिए थे। यानी जमीन पर किसी भी प्रकार की खुदाई, निर्माण या परिवर्तन सख्त प्रतिबंधित था।
लेकिन इन आदेशों की परवाह किए बिना बीती रात खुली बेशर्मी और प्रशासनिक मिलीभगत का ऐसा नंगा नाच देखने को मिला जिसने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया। आरोप है कि इंडियन ऑयल कंपनी के अधिकारी बताए जा रहे रामवीर ने कथित रूप से जिम्मेदारों से सांठगांठ कर आधी रात को विवादित भूमि में भारी भरकम मशीनरी मंगवाई और एक विशाल डीज़ल टैंकर को जमीन के भीतर दबाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया।लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में जिस तरह टैंकर को अंदर डाला गया, उससे साफ दिखता है कि पूरा खेल कानून को धोखा देने और न्यायालय के आदेश को रौंदने के लिए रचा गया था। कोर्ट की स्पष्ट रोक के बावजूद जमीन पर मशीन चलाना, खुदाई करना और टैंकर दबाना न केवल आदेश की अवहेलना है बल्कि कानून के अधिकार पर सीधा हमला है।गौर करने वाली बात यह है कि विवादित जमीन पर पहले हरा भरा बाग था और वहां मौजूद हरे पेड़ों को काटकर पहले ही भारी क्षति पहुंचाई गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ काटे जाने को लेकर भी विवाद उठा था, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें मूंद लीं। अब जमीन में टैंकर दबाने की घटना ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया है।पीड़ित पक्ष का कहना है कि कोर्ट के आदेश को रद्दी कागज़ समझने वाले ऐसे लोग न्याय व्यवस्था का मज़ाक बना रहे हैं। गांव में गुस्सा इस कदर है कि लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह घटना कानून की हत्या और प्रशासनिक संरक्षण का घोर उदाहरण है।लोगों ने कहा है कि यदि इस पूरे प्रकरण पर तत्काल कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि न्यायालय के आदेश की कोई कीमत नहीं रह गई। पीड़ित पक्ष ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि कानून तोड़ने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।


