इटावा: सड़क हादसों के बाद फर्जी बीमा पॉलिसी के जरिए लाखों रुपये का मुआवजा लेने की कोशिश का गंभीर मामला उजागर हुआ है। दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों की ओर से क्रमशः 13 लाख 80 हजार रुपये और 13 लाख 30 हजार रुपये का क्लेम अदालत में प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय में विचाराधीन इन दावों की जांच के दौरान बीमा पॉलिसियां फर्जी पाई गईं, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। एसीजेएम चतुर्थ न्यायालय के आदेश पर संबंधित वाहन स्वामियों और शोरूम से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
प्रकरण के अनुसार, दोनों सड़क दुर्घटनाओं के बाद मृतकों के स्वजन की ओर से बीमा कंपनी के समक्ष मुआवजा दावा प्रस्तुत किया गया था। दावा राशि अधिक होने के कारण बीमा कंपनी ने पॉलिसी दस्तावेजों की गहन जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि प्रस्तुत की गई बीमा पॉलिसियां कथित तौर पर फर्जी थीं और कंपनी के आधिकारिक अभिलेखों में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
मामले में बीमा कंपनी के जांच अधिकारी की ओर से संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। कंपनी के मैनेजर भंवर सिंह राजावत ने विनोद बाबू शर्मा निवासी बेरीखेड़ा बकेवर तथा राहुल यादव निवासी बकेवर के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है और दस्तावेजों की सत्यता के लिए तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फर्जी पॉलिसी किस स्तर पर तैयार की गई और इसमें वाहन मालिकों या शोरूम संचालकों की क्या भूमिका रही। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनी को गुमराह करने का प्रयास किया गया। यदि समय रहते जांच न होती तो लाखों रुपये की क्षति संभव थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना गंभीरता से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बीमा कंपनी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी रोकने के लिए पॉलिसी सत्यापन प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया जाएगा।
जनपद में सामने आया यह मामला बीमा धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की ओर संकेत करता है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बीमा पॉलिसी को जारी कराने से पहले उसकी वैधता और आधिकारिक स्रोत की पुष्टि अवश्य करें, ताकि इस प्रकार की ठगी से बचा जा सके।


