फर्रुखाबाद: यूथ इंडिया संवाददाता: फर्रुखाबाद के नेकपुर कलां प्लाटिंग विवाद (plotting dispute) में पवन कटियार पर अब सुनियोजित साजिश रचने के और गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पहले उसने अनूप सिंह राठौर उर्फ रच्छू विमलेश दुबे आदि के खिलाफ कार्रवाई कराते हुए उसे जिला बदर करवाया और उसके बाद अचानक यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि उक्त जमीन वरिष्ठ भाजपा नेता (BJP leaders) वीरेंद्र सिंह राठौर ने ले ली है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। वास्तव में वीरेंद्र सिंह राठौर की छवि साफ सुथरे नेताओं में गिनी जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया गया, वहाँ बीजेपी नेता शंकर सिंह द्वारा अपने मकान निर्माण के लिए खरीदी गई थी। यह जमीन पहले से ही विवादित थी, रच्छू ठाकुर को लगा की जमीन वीरेंद्र सिंह राठौर और शंकर सिंह ने खरीद ली है तो वह उनके खिलाफ फेसबुक पर भड़ास निकालने लगा जिसका मुकदमा शंकर ने फतेहगढ़ कोतवाली में बीते गुरुवार दर्ज कराया वीरेंद्र सिंह राठौर के करीबी ने भी उसी दिन रच्छू के विरुद्ध दलित उत्पीड़न का मुकदमा पंजीकृत कराया। इसके बावजूद पवन कटियार ने पूरे मामले को जानबूझकर तूल देते हुए झगड़े का रुख भाजपा नेताओं की ओर मोड़ने की रणनीति अपनाई, ताकि वह खुद विवाद के केंद्र से बाहर रह सके।
बताया जा रहा है कि सर्किट हाउस से लेकर सोशल मीडिया तक इस नैरेटिव को फैलाने की कोशिश की गई कि जमीन पर कब्जे में भाजपा नेताओं की भूमिका है, जबकि मौके की स्थिति और दस्तावेज कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। भाजपा नेताओं की ओर से आरोपों को पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है तो यह साफ हो जाएगा कि जमीन विवाद की आड़ में किस तरह से नेताओं की छवि खराब करने का प्रयास किया गया। फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


