लखनऊ: अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर देशव्यापी राजनीतिक बहस के बीच, कांग्रेस पार्टी (congress party) ने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगाए गए एक बड़े होर्डिंग ने राजनीतिक चर्चा को हवा दी है और जनता का ध्यान आकर्षित किया है।
इस होर्डिंग के माध्यम से कांग्रेस ने अरावली पहाड़ियों के कथित शोषण को लेकर सरकार और उद्योगपति गौतम अडानी को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। होर्डिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी की एक साथ तस्वीरें हैं, साथ ही बुलडोजर द्वारा पहाड़ों और पेड़ों को काटते हुए दृश्य भी हैं। प्रतीकात्मक चित्रण के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश हो रहा है।
होर्डिंग पर लिखे नारे हैं: “मां के नाम एक पेड़, अडानी के नाम पूरा जंगल। एक पेड़ दिखाकर वोट लिए गए, लेकिन पूरा जंगल अडानी को सौंप दिया गया।” एक अन्य संदेश में चेतावनी दी गई है: “अरावली पर्वतमाला को बचाओ, वरना हवा भी बिक जाएगी।” यह होर्डिंग एनएसयूआई ईस्ट के महासचिव आदित्य शुक्ला ने लगवाया था।
मीडिया से बात करते हुए शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार जहां एक ओर वृक्षारोपण अभियानों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर पूरे जंगलों को निजी कंपनियों के हवाले कर रही है। उन्होंने अरावली पर्वत श्रृंखला की कटाई की अनुमति देकर सरकार पर पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
शुक्ला ने दावा किया कि अडानी समूह को 99 मीटर की ऊंचाई तक पहाड़ों को काटने की अनुमति दी गई है, जबकि अरावली श्रृंखला का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा इससे कम ऊंचाई का है। उनके अनुसार, यह पूरी पर्वत श्रृंखला के विनाश के बराबर है।
उन्होंने आगे कहा कि अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए देशभर के लोग सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन सरकार उदासीन बनी हुई है। इस मुद्दे को महज राजनीतिक मुद्दा न बताते हुए शुक्ला ने कहा कि अरावली पर्वतमाला को बचाना एक नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई स्वच्छ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए है,” और यह भी कहा कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण तक यह संघर्ष जारी रहेगा।


