काशी में मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर सीएम योगी आदित्यनाथ की तीखी प्रेसवार्ता
काशी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi) ने काशी (Kashi) में मंदिरों और मणिकर्णिका घाट को तोड़े जाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एआई-जनरेटेड और भ्रामक वीडियो दिखाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। यह वही “सफेद झूठ” है, जो काशी के समग्र विकास को रोकने की साजिश का हिस्सा है।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले 11 वर्षों में काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसका संवर्धन किया गया है। “विकास और विरासत”—दोनों को साथ लेकर चलना सरकार की प्राथमिकता रही है। सीएम योगी ने कहा कि मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास पौराणिक महत्व और धार्मिक प्रक्रियाओं को अक्षुण्ण रखते हुए किया जाएगा। घाट की मूल आस्था, अंतिम संस्कार की परंपराएं और धार्मिक मर्यादाएं यथावत रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य है कि काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में स्वयं नरेंद्र मोदी करते हैं, जो अक्सर “मेरी काशी” कहते हैं। उनके विज़न के अनुरूप ही परियोजनाएं तैयार हुईं—पुरानी काया को संरक्षित रखते हुए नया कलेवर। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद काशी में श्रद्धालुओं की संख्या ऐतिहासिक रूप से बढ़ी है। पहले प्रतिदिन 5–25 हजार दर्शनार्थी आते थे, जो अब औसतन सवा लाख से डेढ़ लाख तक पहुंच चुके हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या 6–10 लाख तक जाती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले वर्ष 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और धाम के निर्माण के बाद से अब तक काशी ने देश की जीडीपी में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। सीएम योगी ने कहा कि जिन मंदिरों को तोड़े जाने का आरोप लगाया जा रहा है, वे पहले जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थे। उनका पुनरुद्धार हुआ है—ढहाया नहीं गया। आज वे मंदिर अधिक सुदृढ़ और सुसज्जित रूप में श्रद्धालुओं के सामने हैं।
अन्नपूर्णा माता की मूर्ति का प्रश्न
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि सौ वर्ष पहले चोरी होकर यूरोप पहुंची मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को 1947 से 2014 तक केंद्र में रही कांग्रेस सरकारें क्यों नहीं ला सकीं? उन्होंने कहा कि यह विरासत के प्रति संवेदनहीनता का प्रमाण है। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने न तो विरासत का सम्मान किया, न ही विकास में सहयोग। आज भी वह हर उस योजना का विरोध करेगी जो लोक-कल्याण और देश-प्रदेश के विकास से जुड़ी हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“जिन्होंने सदैव विरासत का अपमान किया, उनकी अनर्गल टिप्पणियों पर हंसी भी आती है और दया भी। यह वैसा ही है जैसे सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली।”


