शमशाबाद, फर्रुखाबाद: एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के तहत लोगों को साफ-सफाई और सार्वजनिक शौचालय (Community toilets) के उपयोग के लिए लगातार जागरूक कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बने सामुदायिक शौचालय खुद बदहाली का शिकार हो गए हैं। ऐसा ही एक मामला विकासखंड शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम फरीदपुर सैदाबाद वाला से सामने आया है, जहां सामुदायिक शौचालय पर लंबे समय से ताला लटका हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020-21 में पंचायती राज विभाग द्वारा लाखों रुपये की लागत से सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। शौचालय बनने के बाद गांव के लोगों ने खुले में शौच से निजात मिलने पर खुशी जताई थी और संबंधित जनप्रतिनिधियों का आभार भी व्यक्त किया था। शुरुआत में कुछ समय तक शौचालय का उपयोग हुआ, लेकिन बाद में देखरेख के अभाव में व्यवस्थाएं बिगड़ती चली गईं और अंततः शौचालय पर ताला जड़ दिया गया।
शनिवार को गांव पहुंचे समाचार प्रतिनिधि से ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शौचालय में महीनों से ताला पड़ा है। अंदर गंदगी का साम्राज्य है, जबकि छत पर पानी की टंकी, बिजली की व्यवस्था सहित तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद न जाने क्यों लंबे समय से इसे बंद रखा गया है। शौचालय बंद होने के कारण मजबूरन ग्रामीण पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को खेत-खलिहानों व झाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने इस स्थिति को सरकार के स्वच्छता अभियान की खुली अवहेलना बताया है। उनका कहना है कि यदि सरकार लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रही है तो स्थानीय स्तर पर बनी सुविधाओं को चालू रखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। ग्राम प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी फर्रुखाबाद से मांग की है कि मामले की जांच कराकर लापरवाह जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सामुदायिक शौचालय का ताला तुरंत खुलवाकर साफ-सफाई व अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएं, ताकि ग्रामीणों को खुले में शौच से मुक्ति मिल सके और स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य सही मायनों में पूरा हो।


