बायोगैस से घटेगी तेल-एलपीजी पर निर्भरता, गोपालकों की बढ़ेगी आमदनी
लखनऊ: नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) तेजी से देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) के विजन के तहत राज्य में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने की ठोस रणनीति पर अमल तेज़ हो गया है। इस पहल का केंद्रबिंदु है—गाय के गोबर का बड़े पैमाने पर सदुपयोग, जिससे न केवल क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता घटेगी, बल्कि गोपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गोबर से मीथेन, मीथेन से बचत
वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, प्रदेश में यदि एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का प्रभावी दोहन किया जाए, तो पेट्रोलियम उत्पादों में करीब 500 करोड़ रुपये तक की बचत संभव है। इससे विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण के अंतर्गत 2022 से अब तक 26 से अधिक CBG प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर सहित कई जिलों में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं, 21 से अधिक नए प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं, जो आने वाले समय में राज्य की ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाएंगे।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, CBG को वैकल्पिक ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है। आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव बताते हैं कि एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे मीथेन युक्त बायोगैस बनती है। परिशोधन के बाद यही गैस रसोई और वाहनों में उपयोग योग्य CBG बन जाती है।
बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला CBG प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला जैसे प्रयोग इस मॉडल की व्यवहारिक सफलता के उदाहरण हैं।
गोबर → ऊर्जा → जैव-उर्वरक → कृषि उत्पादकता का यह चक्र न केवल गांवों को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि राज्य को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी आगे ले जाएगा।
निष्कर्षतः, सीएम योगी का यह विजन पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण समृद्धि और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—तीनों को एक साथ साधने की मजबूत पहल है, जो उत्तर प्रदेश को हरित अर्थव्यवस्था की नई पहचान दिला सकता है।


