इस्लामाबाद/ काबुल: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बीते चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी है। हालात जंग जैसे बन गए हैं। तालिबान सरकार का दावा है कि उसने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया है, जो रावलपिंडी में स्थित है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया है कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। तालिबान के अनुसार, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं। इन दावों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार का दावा है कि अब तक 400 से अधिक अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। दोनों देशों के दावों में भारी अंतर देखा जा रहा है।
संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा था कि सीमावर्ती इलाकों में टीटीपी के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया।
27 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। इसके जवाब में अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि पाकिस्तान को “सही समय पर कड़ा जवाब” दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया।
पाकिस्तान ने अपने सैन्य अभियान को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया है, जिसका अर्थ है “अपने हक के लिए खड़े होना”। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के अनुसार अब तक 415 तालिबान लड़ाके मारे गए, 580 से अधिक घायल हुए, 182 पोस्ट तबाह की गईं और 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया है। इसके अलावा 185 टैंक और सैन्य वाहनों को नष्ट करने का भी दावा किया गया है।
पाकिस्तानी वायुसेना ने कहा है कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया। हालांकि इन हमलों के स्वतंत्र सत्यापन की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
वहीं तालिबान का दावा है कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए हैं। तालिबान ने यह भी कहा कि उसने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है। इन दावों पर भी पाकिस्तान की ओर से प्रतिक्रिया सीमित रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव रहा है, विशेषकर टीटीपी को लेकर। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी अफगानिस्तान की जमीन से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव जल्द नहीं थमा तो यह व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है। दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है और हालात फिलहाल सामान्य होते नजर नहीं आ रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


