लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मतदाता सूची में हुए व्यापक संशोधन के चलते करीब 2.04 करोड़ मतदाता कम हो गए हैं, जिसका सीधा असर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के सियासी गणित पर पड़ता नजर आ रहा है। इस बदलाव से कई दिग्गज नेताओं और प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
चुनाव विश्लेषकों के अनुसार, प्रदेश की लगभग 49 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर 5000 वोट से भी कम रहा था। इन सीटों पर अब जितने मतदाता कम हुए हैं, वह पिछले जीत के अंतर से भी अधिक हैं। ऐसे में इन सीटों का पूरा चुनावी समीकरण बदल गया है और मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प होने की संभावना है।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उदाहरण सहारनपुर जिले की नकुड़ विधानसभा सीट है, जहां पिछली बार महज 315 वोटों से जीत-हार तय हुई थी, जबकि एसआईआर प्रक्रिया के बाद यहां 28 हजार से अधिक मतदाता कम हो गए हैं। ऐसे ही कई अन्य क्षेत्रों में भी मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है, जिससे सभी दलों की चिंता बढ़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर प्रदेश के बड़े नेताओं जैसे योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती की चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल अब नए सिरे से वोट बैंक का आकलन करने और अपनी रणनीति में बदलाव करने में जुट गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची में इस बड़े बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मृतक मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लीकेट नामों को हटाना और स्थानांतरण जैसे कारक शामिल हैं। हालांकि, इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम हटने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से नई बहस छिड़ सकती है।
कुल मिलाकर, एसआईआर प्रक्रिया ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है। आने वाले विधानसभा चुनाव में यह बदलाव किस पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगा और किसके लिए चुनौती बनेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
यूपी में एसआईआर का बड़ा असर: 2 करोड़ मतदाता घटे, 49 सीटों पर बदले सियासी समीकरण, 2027 चुनाव में बढ़ी टेंशन


