बंगाल चुनाव में इस बार कम चरणों की चर्चा, दो या तीन फेज में मतदान कराने की उठी मांग
नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी—में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान आज किया जाएगा। चुनाव आयोग शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। हालांकि सबसे ज्यादा नजरें पश्चिम बंगाल के चुनाव पर टिकी हुई हैं, जहां इस बार मतदान कितने चरणों में होगा इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, जो करीब एक महीने तक चला था। उस समय पहला चरण 27 मार्च को शुरू हुआ था, जबकि आठवां और अंतिम चरण 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था। लंबे चुनावी कार्यक्रम के कारण राजनीतिक दलों को लगातार प्रचार अभियान चलाना पड़ा था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी।
इस बार चुनाव आयोग के सामने चुनौती यह है कि पश्चिम बंगाल में मतदान कितने चरणों में कराया जाए। हाल ही में आयोग के अधिकारियों ने दो दिवसीय दौरे के दौरान राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की थी। अधिकांश दलों ने सुझाव दिया कि इस बार चुनाव दो या अधिकतम तीन चरणों में ही कराए जाएं, ताकि चुनावी प्रक्रिया लंबी न खिंचे और खर्च भी कम हो।
राजनीतिक दलों का कहना है कि अधिक चरणों में मतदान होने से चुनाव प्रचार लंबा खिंचता है, जिससे पार्टियों पर आर्थिक और संगठनात्मक दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा कार्यकर्ताओं और संसाधनों को बार-बार अलग-अलग चरणों में लगाना पड़ता है। कई नेताओं का मानना है कि यदि कम चरणों में चुनाव कराए जाएं तो प्रक्रिया अधिक सुगम और कम खर्चीली हो सकती है।
पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में मतदान के चरणों की संख्या कम कर सकता है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की ओर से आज होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही स्पष्ट होगा, जिसका देश भर के राजनीतिक दलों और मतदाताओं को बेसब्री से इंतजार है।


