लखनऊ: ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली के बड़े मामले में STF की कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग (transport department) में हड़कंप मचा हुआ है। नवंबर माह में एसटीएफ ने ओवरलोड ट्रकों से रिश्वत वसूलने वाले एक संगठित गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर लखनऊ, रायबरेली और फतेहपुर के एआरटीओ समेत कुल 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच में आरोप सामने आए कि मौरंग और गिट्टी लदे ओवरलोड ट्रकों को निर्धारित सीमा से अधिक वजन होने के बावजूद रिश्वत लेकर पास कराया जाता था। इस अवैध वसूली से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा था, बल्कि सड़क सुरक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही थी। मामले में 12 नवंबर को लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जनपदों में एफआईआर दर्ज की गई थी।
शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए लखनऊ, रायबरेली और फतेहपुर के एआरटीओ व पीटीओ समेत आठ अधिकारियों को पिछले माह ही निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि में सभी आरोपितों को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
विभागीय जांच की जिम्मेदारी झांसी के उप परिवहन आयुक्त के.डी. सिंह गौर को सौंपी गई है। एसटीएफ द्वारा दर्ज मुकदमे में स्पष्ट आरोप है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से ओवरलोड वाहनों को अवैध रूप से सड़कों पर चलने की अनुमति दी जा रही थी। शासन स्तर पर इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है और संकेत दिए गए हैं कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


