लखनऊ| राजधानी के नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) को कुकरैल नाइट सफारी क्षेत्र में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस मामले में वन विभाग अपना विस्तृत और ठोस जवाब तैयार कर रहा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस जवाब को अगले सप्ताह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि शासन स्तर पर पूरी सहमति के साथ न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा जा सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने चिड़ियाघर को प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी में स्थानांतरित न करने की संस्तुति की है। सीईसी का मानना है कि इस परियोजना से पर्यावरणीय संतुलन और वन क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, वन विभाग इस संस्तुति से सहमत नहीं है और उसका कहना है कि वर्तमान में चिड़ियाघर घनी आबादी के बीच स्थित है, जिसका सीधा असर वन्यजीवों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, शोर-शराबा, ट्रैफिक का दबाव और लगातार बढ़ती भीड़ के कारण जानवरों का प्राकृतिक वातावरण प्रभावित हो रहा है, जिससे उनका ब्रीडिंग पैटर्न भी बाधित हो रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि कई बार एक ही दिन में इतनी अधिक संख्या में दर्शक पहुंच जाते हैं कि उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। सीमित क्षेत्रफल के कारण न तो चिड़ियाघर का समुचित विस्तार संभव है और न ही आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। इसके चलते जानवरों के लिए बेहतर, शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग का तर्क है कि कुकरैल क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत, विस्तृत और प्राकृतिक है, जहां आधुनिक नाइट सफारी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चिड़ियाघर विकसित किया जा सकता है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सीईसी की संस्तुति तब तक बाध्यकारी नहीं मानी जाती, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट उस पर कोई स्पष्ट निर्देश न दे दे। इसी आधार पर वन विभाग ने निर्णय लिया है कि वह पूरे तथ्यों, तकनीकी रिपोर्टों और विशेषज्ञों की राय के साथ अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। उच्चस्तरीय सहमति के बाद ही कोर्ट में जवाब दाखिल किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर विभाग की मंशा और तर्कों पर सवाल न उठे।
इस पूरे प्रकरण में अब अंदरूनी राजनीति की सुगबुगाहट भी सामने आने लगी है। उच्चपदस्थ सूत्रों का दावा है कि चिड़ियाघर शिफ्टिंग और कुकरैल नाइट सफारी परियोजना विभागीय खींचतान का भी शिकार हो रही है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी नाइट सफारी प्रोजेक्ट में अपेक्षित भूमिका और महत्व न मिलने से असंतुष्ट हैं और इसी कारण वे दिल्ली स्तर तक जाकर इस परियोजना के खिलाफ पैरवी कर रहे हैं। शासन और सरकार इस गतिविधि पर भी नजर बनाए हुए हैं और पूरे मामले को गंभीरता से मॉनिटर किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल नाइट सफारी में शिफ्ट करने का मुद्दा अब केवल पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णय, न्यायिक प्रक्रिया और विभागीय राजनीति का भी अहम केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में मुख्य सचिव की बैठक और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाला जवाब इस परियोजना की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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