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Thursday, January 1, 2026

बदलता उत्तर प्रदेश : योजनाओं से नहीं, नीयत से आती है पहचान

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शरद कटियार

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) का वक्तव्य केवल आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण नहीं था, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की बदली हुई कार्यसंस्कृति और शासन की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत भी था। एमएसएमई, निवेश, रोजगार और वेलफेयर योजनाओं को जिस आत्मविश्वास के साथ सरकार ने सदन में रखा, वह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश अब केवल संभावनाओं का राज्य नहीं, बल्कि परिणामों का प्रदेश बनता जा रहा है।

एक समय था जब उत्तर प्रदेश के परंपरागत उत्पाद पहचान के संकट से जूझ रहे थे। कारीगर थे, हुनर था, लेकिन बाजार नहीं था। सरकारों की उदासीनता ने इन उद्योगों को धीरे-धीरे हाशिए पर धकेल दिया। आज वही परंपरागत उत्पाद—चाहे वह काला नमक चावल हो या एक जनपद–एक उत्पाद योजना—ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात के माध्यम से वैश्विक बाजार में जगह बना रहे हैं। यह बदलाव किसी एक योजना का नहीं, बल्कि सोच में आए परिवर्तन का परिणाम है।

96 लाख एमएसएमई इकाइयों के जरिए लगभग दो करोड़ परिवारों को रोजगार मिलना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक-आर्थिक बदलाव की कहानी है जिसमें रोजगार के लिए पलायन अब मजबूरी नहीं रह गया। जब प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात एमएसएमई सेक्टर के जरिए कर रहा हो, तो यह स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था की जड़ें मजबूत हुई हैं।

निवेश के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ा है। 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और उनमें से बड़ी राशि का जमीन पर उतरना यह बताता है कि निवेशक अब प्रदेश की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। सात लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलना और ब्रह्मोस मिसाइल जैसी अत्याधुनिक परियोजना का लखनऊ में स्थापित होना यह संकेत देता है कि प्रदेश अब केवल श्रम नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक का केंद्र भी बन रहा है।

सबसे अहम पहलू यह है कि सरकार ने वेलफेयर योजनाओं को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से लागू करने का दावा किया है। आवास, राशन, उज्ज्वला, आयुष्मान और राहत कोष—इन सभी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव पहुंचाने की बात यदि धरातल पर उतरी है, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप है। 403 विधानसभा क्षेत्रों तक विकास राशि पहुंचने का दावा सरकार की जवाबदेही भी तय करता है।

हालांकि, चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं। निगरानी, पारदर्शिता और गुणवत्ता पर निरंतर ध्यान देना जरूरी होगा, ताकि योजनाएं केवल कागजों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें। लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश अब ठहराव की राजनीति से आगे बढ़कर विकास और विश्वास की राजनीति की ओर कदम बढ़ा चुका है। यही बदलाव आने वाले समय में प्रदेश की सबसे बड़ी पहचान बन सकता है।

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