– दलित राजनीति से मुस्लिम मुद्दों की ओर बढ़ते कदम
– बयान के बाद तेज हुई बहस
लखनऊ/नगीना। नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। हाल ही में नबी की शान को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि चंद्रशेखर आज़ाद अब दलित राजनीति के साथ-साथ मुस्लिम मुद्दों को भी केंद्र में ला रहे हैं।
अब तक चंद्रशेखर आज़ाद की पहचान एक मुखर दलित नेता के रूप में रही है। सामाजिक न्याय, संविधान, आरक्षण और दलित उत्पीड़न उनके प्रमुख मुद्दे रहे हैं। लेकिन बीते कुछ समय से उनके बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े सवालों पर खुलकर बोलने का रुझान बढ़ा है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल
नबी की शान में गुस्ताखी को लेकर दिए गए बयान को राजनीतिक विश्लेषक दलित–मुस्लिम समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए सामाजिक गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
उत्तर प्रदेश में दलित और मुस्लिम मतदाता मिलकर एक बड़ा वोट बैंक बनाते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चंद्रशेखर आज़ाद इस वर्ग को एक मंच पर लाकर खुद को मुख्यधारा की राजनीति में मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह दलित राजनीति से हटना नहीं, बल्कि बहुजन राजनीति का विस्तार है। वहीं, विरोधी दलों और कुछ दलित संगठनों का आरोप है कि धार्मिक मुद्दों पर ज्यादा जोर देने से मूल दलित एजेंडा कमजोर पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चंद्रशेखर आज़ाद की यह रणनीति आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। यह प्रयोग कितना सफल होगा, इसका फैसला आने वाले चुनावों में मतदाता करेंगे।
फिलहाल इतना साफ है कि चंद्रशेखर आज़ाद की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां दलित मुद्दों के साथ मुस्लिम सवाल भी सियासी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होते दिख रहे हैं।





