बरेली: होली से पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में सरसों तेल समेत कई खाद्य तेलों के नमूने अधोमानक पाए जाने से बाजार में हलचल मच गई है। फरीदपुर स्थित खंडेलवाल एडिवल ऑयल फैक्ट्री से लिए गए आठ नमूनों में से पांच नमूने लैब जांच में मानक पर खरे नहीं उतरे। इनमें कच्ची घानी सरसों तेल (चक्र ब्रांड), मल्टी सोर्स एडिवल ऑयल, रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और रैपसीड ऑयल शामिल हैं।
एफएसडीए प्रयोगशाला की रिपोर्ट सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। जिस ब्रांड पर लोग वर्षों से भरोसा करते आए थे, उसके नमूने अधोमानक पाए जाने से खाद्य तेल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कारोबारी सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट के बाद संबंधित ब्रांड की बिक्री प्रभावित हुई है, हालांकि कुछ स्थानों पर स्टॉक अब भी बाजार में उपलब्ध बताया जा रहा है।
त्योहारी सीजन को देखते हुए विभाग ने बरेली में ताबड़तोड़ छापेमारी की। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय कुमार गोयल के नेतृत्व में विभिन्न स्थानों से 10 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। राजेंद्रनगर स्थित रिद्धि इंटरप्राइजेज से 1191 किलोग्राम संदिग्ध सरसों तेल (अनुमानित मूल्य 1.77 लाख रुपये) जब्त कर सीज किया गया।
इसी कार्रवाई में 580 किलोग्राम संदिग्ध पनीर (मूल्य लगभग 1.16 लाख रुपये), 18 किलोग्राम खोया और 48 किलोग्राम कचरी भी जब्त कर नष्ट कराई गई। कानपुर में 786 किलोग्राम मिलावटी पनीर पकड़ा गया, जिसकी आपूर्ति बरेली के कारोबारी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। मामले की सूचना बदायूं प्रशासन को भी भेजी गई है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला की जांच की जा सके।
जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में खाद्य तेल का कारोबार 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का है, जिसमें बरेली क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 1,000 करोड़ रुपये आंकी जाती है। ऐसे में अधोमानक उत्पादों की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है।
एफएसडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रमाणित और वैध पैकेजिंग वाले उत्पाद ही खरीदें तथा किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें।


