फर्रुखाबाद। जनपद में चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारु और विवादमुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने गांव-गांव ग्राम चौपाल लगाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत निर्धारित तिथियों पर विभिन्न ग्राम पंचायतों में चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों को चकबंदी की प्रक्रिया, लाभ और उनकी शंकाओं के समाधान के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सीधी संवाद प्रक्रिया से न केवल भ्रम दूर होंगे, बल्कि लंबित आपत्तियों और विवादों का मौके पर ही समाधान भी संभव हो सकेगा।
यह जानकारी देते हुए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिनेश कुमार ने बताया कि चकबंदी से संबंधित प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। कार्यक्रम के अनुसार 24 फरवरी को ग्राम चाचूपुर एवं जटपुरा में ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाएगा। 25 फरवरी को भूलनपुरवा त्रिपुरा और मुरादपुर में चौपाल लगेगी। 26 फरवरी को गनपतिपुर, बढ़नपुर तथा चौसपुर में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी। इसके अतिरिक्त 28 फरवरी को बंदर शाहपुर में ग्राम चौपाल आयोजित की जाएगी।
एडीएम ने बताया कि इन चौपालों में राजस्व विभाग, चकबंदी विभाग तथा संबंधित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। चकबंदी लेखपालों को भी निर्देशित किया गया है कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दें, अधिक से अधिक ग्रामीणों को चौपाल में भाग लेने के लिए प्रेरित करें और उन्हें अपनी आपत्तियां व समस्याएं खुलकर रखने के लिए जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि चकबंदी केवल भूमि पुनर्व्यवस्था की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह किसानों को सुविधा प्रदान करने, बिखरी जोतों को समेकित करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की एक महत्वपूर्ण योजना है। कई बार जानकारी के अभाव में ग्रामीणों के मन में आशंकाएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें दूर करना प्रशासन की प्राथमिकता है। ग्राम चौपाल के माध्यम से अधिकारी सीधे किसानों से संवाद करेंगे और मौके पर ही समाधान का प्रयास करेंगे।
एडीएम ने स्पष्ट किया कि चौपाल में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से दर्ज किया जाएगा तथा उनके निस्तारण की समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे निर्धारित तिथियों पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्याएं रखें और चकबंदी प्रक्रिया को सफल बनाने में प्रशासन का सहयोग करें।
प्रशासन का मानना है कि संवाद और सहभागिता से ही विकास की प्रक्रिया को गति मिलती है। ऐसे में यह ग्राम चौपाल कार्यक्रम न केवल चकबंदी को गति देगा, बल्कि गांव स्तर पर प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा।






