धर्म-आस्था | विशेष समाचार
भारत में देवी शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होने जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व पूरे देश के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों—तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार नवरात्र की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है। इस दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा शुरू की जाती है। श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास, जप और पूजा-अर्चना के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
दक्षिण भारत में अलग परंपरा
दक्षिण भारत में नवरात्र को विशेष रूप से “गोलू” या “कोलू” उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस परंपरा में घरों और मंदिरों में देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां और खिलौनों की सजावट की जाती है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर पूजा करते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं।
कर्नाटक के मैसूर, तमिलनाडु के मंदिरों और आंध्र-तेलंगाना के शक्तिपीठों में इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
नौ दिनों तक होगी नवदुर्गा की पूजा
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है—
मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
भक्तों का मानना है कि इन नौ दिनों की साधना से जीवन में सुख-समृद्धि, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
राम नवमी के साथ होगा समापन
नवरात्र का समापन राम नवमी के साथ होता है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक आचार्यों के अनुसार नवरात्र केवल पर्व नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और शक्ति साधना का अवसर है, जो समाज में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।


