वाराणसी
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज से पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। वाराणसी में मां कुष्मांडा के दरबार में करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार लगी है। भक्तों के स्वागत के लिए रेड कार्पेट तक बिछाया गया है, जिससे माहौल और भव्य हो गया है। वहीं मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में भी भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइन देखने को मिल रही है।
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, लेकिन उन्होंने भगवान भगवान शिव की नगरी काशी को अपना निवास स्थान चुना। काशी में वरुणा नदी के किनारे स्थित उनका प्राचीन मंदिर देशभर में अद्वितीय माना जाता है, जहां मां स्वयं विराजमान मानी जाती हैं। अन्य शक्तिपीठों के विपरीत यहां प्रतिमा या पिंडियों के बजाय मां का साक्षात स्वरूप पूजित है। यह मंदिर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से करीब 4 किलोमीटर दूर अलईपुरा क्षेत्र में स्थित है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार नवरात्रि कई मायनों में विशेष है। करीब 89 साल बाद ऐसा संयोग बना है, जब नवरात्रि पुराने वर्ष में शुरू होकर नए वर्ष में समाप्त होगी। साथ ही मान्यता है कि इस बार माता जगदंबा पालकी पर सवार होकर आई हैं, जो सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।
ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार बृहस्पति संवत्सर का लोप होगा और नया वर्ष रौद्र संवत्सर से शुरू होगा। नए संवत्सर में राजा गुरु (बृहस्पति) और मंत्री मंगल ग्रह होंगे, जिसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जा रहा है। इन विशेष योगों के कारण इस बार की नवरात्रि को और अधिक फलदायी और शुभ माना जा रहा है।


