अमेरिकी रिपोर्ट में चीन के दुष्प्रचार का खुलासा, राफेल पर फर्जी अभियान से पाकिस्तान को जे-35 बेचने की कोशिश

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नई दिल्ली। अमेरिकी कांग्रेस के अधीन अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़प के दौरान चीन ने न केवल पाकिस्तान को हथियार और खुफिया जानकारी मुहैया कराई, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए दुष्प्रचार अभियान भी चलाया।

745 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने सोशल मीडिया पर फर्जी खाते बनाकर राफेल लड़ाकू विमानों के कथित मलबे की झूठी तस्वीरें फैलाईं। इनमें एआई और वीडियो गेम से तैयार की गई तस्वीरें भी शामिल थीं। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि चीन के हथियार फ्रांस के राफेल विमानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस दुष्प्रचार के चलते इंडोनेशिया ने राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया रोक दी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को भारतीय सेना की लाइव स्थिति की जानकारी भी दी। भारतीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि चीन इस पूरे घटनाक्रम को अपने आधुनिक हथियारों की क्षमता जांचने और उन्हें वैश्विक स्तर पर बेचने के अवसर के रूप में देख रहा था। पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह पहला मौका था जब चीन की एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम, पीएल-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और जे-10 लड़ाकू विमान जैसी आधुनिक प्रणालियां वास्तविक सैन्य संघर्ष में इस्तेमाल हुईं। जून 2025 में चीन ने पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के 40 जे-35 लड़ाकू विमानों, केजे-500 विमान और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली की पेशकश भी की।

रिपोर्ट दलाई लामा से जुड़े विवाद का भी उल्लेख करती है। चीन ने भारत सरकार से 14वें दलाई लामा का समर्थन न करने का आग्रह किया है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दलाई लामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि 15वें दलाई लामा का चयन दलाई लामा ट्रस्ट ही करेगा।

अमेरिकी रिपोर्ट के इन खुलासों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, सूचना युद्ध और चीन-पाकिस्तान सैन्य सहयोग पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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