– कॉल रिकॉर्डिंग और नकली करेंसी से हुआ ट्रैप ऑपरेशन सफल
लखनऊ: CBI ने एक बड़े ट्रैप ऑपरेशन के तहत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के दो इंस्पेक्टरों (inspectors) को 10 लाख रुपए की रिश्वत (bribe) लेते मंगलवार को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह और रवि रंजन शामिल हैं, जिन्होंने देवा नर्सिंग होम के संचालक गयासुद्दीन अहमद से कोडीन सिरप के मामले में नाम हटाने की एवज में पैसे मांगे थे। सीबीआई ने इस मामले में गयासुद्दीन और एक अन्य व्यक्ति सुनील जायसवाल के खिलाफ भी केस दर्ज किया है, जबकि एक और इंस्पेक्टर आदेश योगी को हिरासत में लिया गया है।
सीबीआई को पहले से ही इन इंस्पेक्टरों और नर्सिंग होम संचालक के बीच डील की सूचना मिल चुकी थी। जांच एजेंसी ने कॉल रिकॉर्डिंग, लोकेशन सर्विलांस और ट्रांजैक्शन पॉइंट पर नजर रखने के लिए तीन टीमों में ऑपरेशन को अंजाम दिया। नकली करेंसी के बंडल और हिडन कैमरे के जरिए सबूत जुटाए गए। जैसे ही गयासुद्दीन से 10 लाख रुपए की रिश्वत ली गई, सीबीआई ने घेराबंदी कर दोनों अधिकारियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। रकम बरामद हुई और पूरी कार्रवाई को वीडियो में रिकॉर्ड किया गया।
सीबीआई को शक है कि यह मामला सिर्फ एक बार की रिश्वतखोरी का नहीं है। एजेंसी अब पुराने मामलों की भी जांच कर रही है। गौरतलब है कि 26 जुलाई को अमीनाबाद की एक दवा मार्केट से सीबीएन ने भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं जब्त की थीं, जिनमें 20 लाख टैबलेट और 5700 कोडीन सिरप की बोतलें शामिल थीं। इसके बाद सीबीएन की कार्रवाई में कई नाम जोड़ने और हटाने को लेकर डीलिंग के संकेत मिले थे।
सीबीआई की इस कार्रवाई से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के लखनऊ कार्यालय में हड़कंप मच गया। मंगलवार शाम से ही मंदिर मार्ग स्थित कार्यालय की गहन तलाशी शुरू हुई, जहां सीबीआई ने आवाजाही पर रोक लगाकर हर कमरे की छानबीन की। देर रात तक आरोपियों के ठिकानों पर भी जांच जारी रही। यह ऑपरेशन न केवल भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जांच एजेंसियां अब सिस्टम के भीतर बैठे ऐसे अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने लगी हैं जो कानून की आड़ में अवैध लेनदेन में लिप्त हैं।