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Wednesday, March 11, 2026
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भारत में वैज्ञानिकों के लिए 2025 का दृष्टिकोण: चुनौतियां, अवसर और आगे बढ़ने के रास्ते 

डॉ विजय गर्ग जैसे-जैसे भारत 21वीं सदी के तीसरे दशक में आगे बढ़ रहा है, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का परिदृश्य तेजी से विकसित हो रहा...

वाणी में विनम्रता, कर्म में श्रेष्ठता ही महान व्यक्तित्व की पहचान

डॉ प्रभात अवस्थी समाज में व्यक्ति की पहचान उसके शब्दों से पहले उसके कर्मों से होती है, लेकिन शब्दों का महत्व भी कम नहीं। श्रेष्ठ...

आत्ममूल्यांकन से प्रसन्नता, पर-मूल्यांकन से परेशानी

भरत चतुर्वेदी “प्रसन्न वह है जो अपना मूल्यांकन करता है, परेशान वह है जो दूसरों का मूल्यांकन करता है”—यह पंक्ति आधुनिक जीवन की सबसे गहरी...

कुर्मी दांव से ओबीसी राजनीति साधने की बीजेपी की कोशिश, लेकिन लोधी असंतोष ने बढ़ाई चुनौती

प्रशांत कटियार लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में करारी चोट खाने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब ओबीसी सोशल इंजीनियरिंग को दोबारा मजबूत करने...

दिवास्वप्न’ की रोशनी में आज की शिक्षा व्यवस्था

प्रमोद दीक्षित मलय  भारतीय शिक्षा साहित्य में कुछ ही ऐसी कृतियाँ हैं जो विद्यालय, शिक्षक, विद्यार्थी और समाज के आपसी रिश्तों को इतनी गहराई से...

वंदे मातरम् : मातृभूमि के प्रति समर्पण, बलिदान और स्वतंत्रता का अमर उद्घोष

भरत चतुर्वेदी “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। यह वह मंत्र है, जिसने गुलामी की जंजीरों में जकड़े...

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