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Thursday, March 12, 2026
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मनुष्यता और जाहिलता के बीच खड़ी इंसानियत

प्रभात यादव मनुष्यता यह कहती है कि जब किसी दूसरे इंसान को कष्ट, दुख या तकलीफ में देखें, तो हमारा मन भीतर से विचलित हो...

कौशल को न पहचानने की लागत

डॉ. विजय गर्ग वर्ष 2025 ने भारत के लिए एक कठोर सत्य की पुष्टि कर दी है: वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की दौड़ केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता से...

भविष्य इंतजार नहीं करेगा, न ही एसटीईएम में महिलाओं को ऐसा करना चाहिए

डॉ. विजय गर्ग पिछले दशक में, वैश्विक निगमों, नीति निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों ने यह घोषणा की है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित...

फर्जी कंपनियों पर प्रहार: जीएसटी व्यवस्था की सफाई या तात्कालिक सख्ती?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर बना गौतमबुद्ध नगर आज उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। राज्य के कुल राजस्व में सबसे...

स्याही, दिशा और सार्थकता का दर्शन

भरत चतुर्वेदी स्याही जब तक बोतल में बंद रहती है, तब तक वह केवल एक द्रव है। न उसका कोई अर्थ होता है, न कोई...

मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना

डॉ. सत्यवान सौरभ मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है।...

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