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Thursday, February 19, 2026
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संपादकीय

पत्रकारिता लोकतंत्र की नींव, देश के राष्ट्रनिर्माता ही पत्रकार थे तो हम चौथे नहीं पहले स्तंभ

क्योंकि भारत की आज़ादी और संविधान की रचना पत्रकारों की कलम से ही शुरू हुई भारत में पत्रकारिता को अक्सर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा...

मतदाता सूची में मृतकों और फर्जी नामों का जाल—लोकतंत्र की आत्मा पर सबसे बड़ा प्रहार

लखनऊ की विशेष पुनरीक्षण रिपोर्ट ने खोली राष्ट्रव्यापी सत्य की परतें—अब पूरे देश में मतदाता शुचिता अभियान की आवश्यकता दश की निर्वाचन व्यवस्था केवल चुनावों...

“सच्ची जांच को दबाना और फर्जी जांच खड़ी करना—यही आज का प्रशासनिक भ्रष्टाचार है”

फर्रुखाबाद के एस.के.एम. इंटर कॉलेज और कृष्णा पब्लिक स्कूल की मान्यता का मामला अब पूरी तरह साफ है। 2020 में जिलाधिकारी द्वारा कराई गई...

सशस्त्र सेना झंडा दिवस : सैनिक सम्मान की राजनीति नहीं, ज़मीनी हकीकत की मांग

शरद कटियार भारत में 07 दिसंबर को मनाया जाने वाला सशस्त्र सेना झंडा दिवस सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। यह वह दर्पण है,...

राजनीति की प्रयोगशाला में इतिहास को हथियार बनाने का खेल

भारत का इतिहास तारीखों से नहीं, बल्कि उन तारीखों पर दोहराए जाने वाले राजनीतिक नाटकों से घायल होता है। 6 दिसंबर ऐसी ही एक...

भारत-रूस शिखर वार्ता: शांति की दिशा में निर्णायक कदम

शरद कटियार भारत और रूस के बीच हुई ताज़ा शिखर वार्ता सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की...

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