प्रयागराज। चाइनीज मांझा और लेड-कोटेड/नायलॉन मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल शासनादेश जारी करना पर्याप्त नहीं है; ठोस कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कानूनी ढांचा मजबूत करने पर जोर
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रतिबंध को लागू कराने के लिए कौन-कौन से विधिक प्रावधान लागू किए गए हैं। अदालत ने कहा कि कागजी आदेशों से हादसे नहीं रुकते; जमीनी स्तर पर जब्ती, एफआईआर, अभियोजन और नियमित निगरानी जरूरी है।
निर्माण-बिक्री-इस्तेमाल पर रोक
न्यायालय ने निर्देश दिया कि लेड-कोटेड और नायलॉन (सिंथेटिक) मांझे के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। त्योहारों के मौसम में विशेष अभियान चलाकर बाजारों में छापेमारी और जागरूकता अभियान भी संचालित किए जाएं।
अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाबी हलफनामा मांगा है, जिसमें यह बताया जाए कि अब तक क्या कार्रवाई की गई, कितनी जब्ती हुई, कितने मामलों में मुकदमा दर्ज हुआ और भविष्य की कार्ययोजना क्या है।
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि अनुपालन में ढिलाई पाई गई तो और कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं।
चाइनीज मांझा और धातु/लेड-कोटेड धागे से हर वर्ष दोपहिया सवारों, पैदल राहगीरों और पक्षियों को गंभीर चोटें लगती हैं। कई मामलों में जानलेवा हादसे भी हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांझा पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए खतरनाक है।
चाइनीज मांझा पर हाईकोर्ट की सख्ती, लेड-कोटेड और नायलॉन मांझे पर रोक के निर्देश


