लखनऊ। राजधानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट की संस्तुति के आधार पर अब उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इस संशोधन के तहत भर्ती, कोटा, चयन प्रक्रिया और पदोन्नति से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे न्यायिक सेवा की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।
कैबिनेट के इस निर्णय के बाद न्यायिक सेवा में भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। संशोधन के अनुसार भर्ती के स्रोत से जुड़े नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम-18, पदोन्नति से संबंधित नियम-20, नियुक्ति से जुड़े नियम-22 और परिशिष्ट-1 में संशोधन किया जाएगा। इन बदलावों का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों के चयन और पदोन्नति की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धात्मक बनाना बताया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर दी जाएगी तथा इसके लिए संबंधित अधिकारियों को उपयुक्तता परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक अधिकारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और योग्य अधिकारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत वही सिविल जज इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कुल मिलाकर कम से कम सात वर्ष का अनुभव हो। इस बदलाव से न्यायिक सेवा में प्रतिभाशाली अधिकारियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा अधिवक्ताओं के माध्यम से होने वाली सीधी भर्ती के कोटे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा, जिसके तहत बार से योग्य अधिवक्ताओं को सीधे उच्चतर न्यायिक सेवा में नियुक्ति दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से न्यायिक सेवा की गुणवत्ता को और मजबूत किया जा सकेगा। साथ ही न्यायिक अधिकारियों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, संतुलित और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाने और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


