— SC से रोक के बाद भी कार्रवाई पर सवाल, अधिकारों के दुरुपयोग की आशंका जताई
उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर न्यायिक सख्ती देखने को मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान बुलडोजर कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कई अहम सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसी कार्रवाइयों पर रोक लगाई जा चुकी है, तो इसके बावजूद प्रदेश में मकानों को तोड़ा जाना चिंता का विषय है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि क्या शीर्ष अदालत के फैसले का पालन नहीं किया जा रहा है?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बिना उचित प्रक्रिया के मकान गिराना नागरिकों के अधिकारों का गलत इस्तेमाल माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि बुलडोजर की कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए, अन्यथा यह मनमानी की श्रेणी में आएगी।
मामला हमीरपुर जिले से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता ने प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मकान ध्वस्त करने का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि कार्रवाई से पहले न तो पर्याप्त नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का पूरा अवसर मिला।
हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए सरकार से जवाब मांगा है और स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने संकेत दिए कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ, तो सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है। तब तक राज्य सरकार को अपना पक्ष और कार्रवाई से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत के सामने रखने होंगे।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश और भी स्पष्ट हो सकते हैं, जिसका असर पूरे प्रदेश की नीति पर पड़ सकता है।

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