लखनऊ। प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह सच्चाई पर आधारित नहीं हैं। यूथ इंडिया की पड़ताल में सामने आया है कि जिस बैठक को भाजपा के सभी ब्राह्मण विधायकों की बैठक बताया गया, उसमें सभी ब्राह्मण भाजपा विधायक शामिल नहीं थे।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में करीब एक दर्जन विधायक ही मौजूद थे, जबकि सोशल मीडिया पर संख्या कहीं अधिक दिखाई गई। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे विधायकों के नाम भी बैठक से जोड़ दिए गए, जो उसमें शामिल ही नहीं हुए थे। बैठक से जुड़े कागज़ों में कई फर्जी या बिना सहमति के हस्ताक्षर होने की चर्चा भी सामने आई है।
इस बैठक को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पर भी सोशल मीडिया में तीखी टिप्पणियां की गईं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ न तो कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है और न ही यह बैठक पार्टी की ओर से अधिकृत थी। जाति आधारित बैठकों को लेकर उनकी आपत्ति को पार्टी अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे मामले को सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जिससे यह संदेश गया कि भाजपा में बड़ा असंतोष है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
फर्जी हस्ताक्षर और बिना सहमति नाम जोड़ने जैसे आरोप यदि सही पाए जाते हैं, तो यह राजनीतिक मर्यादा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल यह साफ है कि ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी अधूरी और भ्रामक है। यूथ इंडिया इस मामले से जुड़े तथ्यों की आगे भी जांच करता रहेगा।




