➤ पूर्व मंत्री स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड फिर चर्चा में
➤ पूर्व विधायक विजय सिंह समेत आरोपियों को उम्रकैद
➤ सुप्रीम कोर्ट में अपील पर सुनवाई टली, अगली तारीख का इंतजार
➤ पुत्र और सदर विधायक सुनील द्विवेदी कर रहे मजबूत पैरवी
नई दिल्ली /फर्रुखाबाद: प्रदेश के चर्चित स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया सुर्खियों में है। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह की सुप्रीम कोर्ट में अपील पर बुधवार को प्रस्तावित सुनवाई टल गई।
सुनवाई टलने के साथ ही अब एक बार फिर पूरे जिले की नजरें अगली तारीख पर टिक गई हैं। वहीं दूसरी ओर, दिवंगत नेता के पुत्र और फर्रुखाबाद सदर से विधायक सुनील द्विवेदी इस मामले में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने पिता के हत्यारों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रबल पैरवी कर रहे हैं।
वर्ष 1997 में फर्रुखाबाद में भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई को प्रमुख कारण माना गया। पुलिस जांच के बाद पूर्व विधायक विजय सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने सभी मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी पूर्व विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर आज सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी कारणों और मामलों के दबाव के चलते सुनवाई टल गई।
अब यह मामला अगली तारीख पर सुना जाएगा, जहां अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है। स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी के पुत्र और वर्तमान सदर विधायक सुनील द्विवेदी इस पूरे मामले में लगातार नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह अपने पिता के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए कानूनी स्तर पर मजबूत पैरवी कर रहे हैं।
उनकी “तिरछी नजर” अब भी इस मामले में शामिल दोषियों पर बनी हुई है, और वह किसी भी स्तर पर ढील देने के पक्ष में नहीं हैं। यह हत्याकांड न सिर्फ एक आपराधिक मामला रहा, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया। एक प्रभावशाली नेता की हत्या और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चर्चा का विषय रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बहुचर्चित मामले में अंतिम मोड़ साबित हो सकता है।


